लगभग 39 दिनों के संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमत हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘विश्व शांति के लिए बड़ा दिन’ बताया।
करीब 39 दिनों तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस समझौते का ऐलान करते हुए इसे ‘विश्व शांति के लिए बड़ा दिन’ बताया। यह बदलाव खास इसलिए है क्योंकि कुछ दिन पहले तक ट्रंप ईरान को ‘स्टोन एज’ में पहुंचाने की धमकी दे रहे थे।
ट्रंप ने कहा कि ईरान अब शांति चाहता है और दुनिया भी यही चाहती है। उन्होंने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की शर्त पर यह युद्धविराम लागू हुआ है, जो दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम रास्ता है।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएगा, जहाजों की आवाजाही में मदद करेगा और ईरान के पुनर्निर्माण में सहयोग देगा। ट्रंप ने इसे मिडिल ईस्ट के लिए ‘गोल्डन एज’ की शुरुआत बताया।
पहले दी थी स्टोन एज की धमकी
सीजफायर से पहले ट्रंप का रुख काफी आक्रामक था। 1 अप्रैल को उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमेरिका ईरान को स्टोन एज में पहुंचा देगा और उसके अहम ढांचों को निशाना बनाएगा।
उन्होंने साफ कहा था कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के पावर प्लांट और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया जाएगा। उस समय उनके बयान से साफ था कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिकी सेना बहुत जल्द अपने सभी सैन्य लक्ष्य हासिल कर लेगी और इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
ईरान का भी सख्त जवाब
ट्रंप की धमकियों के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया। ईरान की ओर से कहा गया कि यह युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक अमेरिका को स्थायी हार और पछतावा नहीं मिलता।
ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फाघारी ने चेतावनी दी कि अमेरिका को और भी कड़े और विनाशकारी हमलों के लिए तैयार रहना चाहिए। इस बयान से साफ था कि दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका था और हालात बेहद गंभीर बने हुए थे।
