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रिवर्स माइग्रेशन की चुनौतियां

रिवर्स माइग्रेशन की चुनौतियां

मैं पौड़ी जिले की ग्रामसभा घुन्ना का रहने वाला हूँ | कोरोना काल के दौरान गांव मे जो संपर्क हुआ उससे पता चला की करीब 7 लोगो ने रिवर्स माइग्रेशन किया है | गांव मे कोरोना काल मे अनेक युवक वापस आये है | यह युवक मेट्रो टाउन मे किसी कंपनी मे अथवा होटल मे तेनात थे | लेकिन कोरोना की भयावक्ता ने इन्हे रिवर्स माइग्रेशन के लिए बाध्य कर दिया | अब इनके सामने रोज़गार की बड़ी  समस्या है | कुछ उत्साही युवको ने हाथो मे कुदाल फावड़ा लेकर खेती करना शुरू कर दिया | कुछ युवक गौ पालन मे जुट गए | शहरो की तरह ना यहाँ रोजगार है ना कार्य संस्कृति |

साशन को रिवर्स माइग्रेशन से जुड़े इन प्रवासी गांव वासियो के लिए एक समेकित योजना बनानी चाहिए | यही स्थिति पहाड़ के सभी गांव मे है | मैदानों मे भी रोजगार के अवसर घटे है | आर्थिक क्रम तेजी से टुटा है |  अतः इन्हे आर्थिक मदद और इनकी कार्य प्रणाली के अनुरूप काम मिलना चाहिए | सिडकुल इसमे अहम भूमिका निभा सकता है | स्ट्रीट फ़ूड भी एक संभावना है | पहाड़ी छेत्रो मे अनाज, दूध उत्पादन के लिए शून्य ब्याज पर लोन दिए जा सकते है | मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना इस दिशा मे काफी कारगर हो सकती है |

निष्कर्ष यह है की पलायन उत्तराखंड की बहुत बड़ी समस्या रही है | गांव खाली हो रहे है | अब जब यहाँ का युवा गांव आने को मज़बूर हो गया है तो उसे यहाँ टिकाने के लिए युद्ध स्तर पर कारवाही करनी होगी | उनका हाथ पकड़ना इस समय का तकाजा है |

लेखक – विजय कुमार