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पुलिस जवानो की सहादत पर मंथन

जवानो की सहादत

एक अपराधी द्वारा कामपुर मे दस जवानो की हत्या से यह तो साबित हो गया की पुलिस ढांचे मे जमीनी स्तर से ही नयी पहल की आवश्यकता है | इस पहल मे ना केवल थानो मे आधुनिक विकल्पो पर सोचना पड़ेगा बल्कि पुलिस के मनोविज्ञान को भी समझना पड़ेगा | इस बदलते मनोविज्ञान मे नयी पुलिस व्यवस्था की जरूरत है | हर थाने के स्तर पर एक ब्लूएबूक रखी जानी चाहिए जिसमे क्षेत्रीय अपराधी सूचीबद्ध हो |


थानो मे अभी सुचना तंत्र नये सिरे से गठित हो | बड़े अपराधियों की गतिविधियों पर यह सूचना तंत्र कारगर होना चाहिए | बदलते सामाजिक आर्थिक समाज मे वर्चस्व की लड़ाई बढ़ती जा रही है | ग्रामीण समाजो मे स्थानीय चुनावों ने इसे बहुत हवा दी है | पुलिस के विरुद्ध मुखबिरी भी एक समस्या है | इसलिए अभिसूचना तंत्र को पुख्ता किया जाना बहुत जरूरी है | इसमे लेखपाल, ग्रामीण विकास अधिकारी और इलाके के जागरूक लोगो को आगे लाना होगा |
स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर क्राइसिस को देखते हुए बड़े अपराध, दंगे, गैंगवार जैसे मामलो मे तैयार किया जाना चाहिए | हमें आधुनिक पेशेवर पुलिस की आवश्यकता है |