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Innovation: ग्राउंड जीरो तक अवसरो का लोकतंत्र

प्रधानमंत्री जी ने आज अपनी मन की बात मे बिहार की मधुबनी आर्ट और दरभंगा से प्रेरित थीम पर बनाये जा रहे मास्क की सहराहाना की| इसी तरह नये पैटर्न मे स्वयं सहायता ग्रुप्स द्वारा तैयार की जा रही रखियो की भी चर्चा हुई | उन्होंने इसे वोकल फॉर लोकल का एक सटीक उदाहरण बताया|

इनोवेशन अथवा नवाचार एक नया युग धर्म है| आम-जन भी अब बाजार मे अपने उत्पाद को लांच करने के लिए इसे अपनी जीवन शैली का अंग बना रहे है| अब नवाचार का जनतांत्रिकरण हो रहा है| आम से खास तक सभी इसकी मूल्य और महत्ता को समझ रहे है|यह विचार जितना मास लेवल तक प्रचार प्रसार पाएगा उतनी ही हमारी स्थानीय आर्थिकी और जीडीपी को बल मिलेगा|
जुगाड़ संस्कृति हमारे देश मे बोलचाल की भाषा मे लम्बे समय से प्रयोग होती आ रही है| जुगाड़ को थोड़ा ठीक कर और आर्थिक लाभ से जोड़कर देखने से इसे नवाचार कहा जा सकता है| यह कार्य स्कूलों से लेकर कॉलेजो तक, विश्वविद्यालयों से लेकर आई आई टी, आई आई म तक सभी जगह होना चाहिए| रिटायर्ड जनसक्ति की कमी किसी भी छेत्र मे नही है| केवल शुष्क क्लासरूम टीचिंग के बजाये नवाचारी शिक्षा के लिए नयी पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी को साथ बैठना चाहिए ताकि नव सृजन का इंद्रधनुष खिल सके|
सकारात्मक सोच विकासशील समाज का प्रतिक है| सकारात्मक सोच आपदाओ को अवसर मे बदल सकती है | क्या हम नवाचारी प्रयोगो और उपलब्धियों पर राष्ट्रीय दिवसो मे जश्न नही बना सकते? आखिर हर नवाचार एक सकारात्मक सोच का परिणाम होता है |

वाचार नॉलेज इकॉनमी का मूल आधार है| आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत लोकल से ग्लोबल होने की चाह का मूल बिंदु भी यही है| हस्थशिल्प, हथकरघा व लोकल आइटम्स मे वैल्यू एडिशन कर अधिक लाभ कमाया जा सकता है और इकॉनमी को बल भी दिया जा सकता है| खेती मे महिलाए नवाचारी प्रयोग कर जैविक खेती से काफी लाभ कमा सकती है| जंगल की जड़ीबूटीयो के सम्बन्ध मे उनकी समझ और जानकारी बहुआयामी है|कोरोना की तबाही के चलते इनके पारम्परिक ज्ञान व समझ का दोहन किया जा सकता है किन्तु जरुरत है इस विचार को मास लेवल पर ले जाने की और लाभप्रद बनाने की |

केवल भारी भरकम प्रयोगशालाओ मे ही इनोवेशन नही पनपती, इसके लिए इसे प्रजातांत्रिक तरीके से हर गांव, हर शेहर, हर परिवार,  हर व्यक्ति तक ले जाना होगा ताकि एक सर्वकालीन व्यापक समझ बनाई जा सके और लाभ कमाया जा सके|

लेखक – विजय ढौंडियाल