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LORD RAM: an unending excitement in Indian conscience ( 1 अंतहीन भारतीय चेतना के प्रतीक )

Lord Ram janmbhoomi decorated like diwali

LORD RAM भारत की कालजयी चेतना और उत्साह के प्रतीक है|कालजयी चेतना के रूप मे भगवान राम की पेठ घर घर तक है|यही कारण है की उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक राम के चरित्र और काव्य लिखें गये है जो जनता मे बेहद लोकप्रिय है|

“ठीक ही कहा गया है राम तुम्हारा चरित्र स्वयं ही काव्य है||

कोई कवि बन जाये सहज सम्भाव्य है ||”

राम भारतीय लोकमानस के लोकनायक है| उन्होंने राजा दशरथ के दरबार के षडयंत्रो को झेला, 14 वर्ष के लिए वनवास भोगा, पत्नी को मुक्त कराने के लिए लंका पर चढाई की, वानरों की सेना तैयार की, रावण को पराजित किया और राम राज्य की स्थापना करी|जीवन मे विभीषिकाएँ कभी कम नहीं होती किन्तु श्री राम के व्यवहार ने उन्हें सौम्यता, जीवंतता और धर्ये के साथ सामना करके यह बताया की लोकनायक के रूप मे जीवन मे सौम्यता का क्या महत्व है|

भगवान राम देवता भी है किन्तु मनुष्य के रूप मे उनकी पीडा, व्यथाये एक आम आदमी से भीन्न नहीं हो सकती|सीता के रावण द्वारा अपहृत होने पर राम का विलाप और रुदन एक आम आदमी से भीन्न नहीं है| वे कातर भाव से जंगली पशु पक्षियों से पूछते है

“हे खग, हे मृग, हे मधुकर श्रेणी

तुम देखी सीता मृगनैनी “

सुख दुख के विकारो की इतनी गहरी चोट राजा के पुत्र के लिए इतिहास और भाग्य का क्रूर निर्णय रहा होगा|

भगवान राम की यही विशेषता थी की वे नर के रूप मे और नारायण के रूप मे भारतीय चेतना मे रचे बसे है| इसीलिए भगवान राम के बिना भारतीय लोक चेतना की कल्पना भी नहीं की जा सकती|जब जब मनुष्य पर विपत्ति आती है उसे राम की संघर्ष गाथा और चेतना तागत प्रदान करती है| संत तुलसीदास और वाल्मीकि ने पग पग पर होने वाली पीड़ा और संघर्ष गाथा को एक अंतहीन दास्तान और दस्तावेज के रूप मे पुश्त किया है|

LORD RAM का फिल्मो और धारावाहिको मे चित्रण

Lord Ram in cinema and television

रामानंद सागर के रामायण धारावाहिक से लेकर तमाम भारतीय फिलमो मे समय समय पर भगवान राम के गीत, प्रार्थनाओ को व्यापक स्थान मिला है|आजादी के दौर मे और उसके बाद के वर्षो मे भगवान राम से जुड़े सन्दर्भो को खूब लोकप्रियता मिली|यहाँ तक की सत्तर के दशक मे अमेरिका मे शुरू हुए हिप्पी आंदोलन को भी हरे रामा, हरे कृष्णा के गाने ने एक नयी ऊर्जा और जोश दिया| फिल्मकारों ने यथा स्थान राम के लोक मंगल रूपों, लोक नायक के सामजिक कोड से लेकर नारायण तक इस चेतना को उत्तर दक्षिण की फिल्मो मे खूब चेतना प्रदान की|

भगवान राम कालजयी है| पग पग पर भारतीय लैंडस्केप मे रचे बसें देवता के रूप मे महान है| अयोध्या मे राम के लंका विजय के बाद लौटने पर अभूतपूर्व दीपावली का उत्सव बनाया गया| आज समय ने फिर करवट ली है|राम मंदिर का भूमि पूजन सामने है| एक दिवाली फिर मनाई जाएगी|

Diwali like celebrations in Ayodhaya

अयोध्या मे दिवाली जैसी तैयारियां 

कण कण से भारती मिट्टी का पैगाम, सप्त नदियों का जल और लाखो दुआओ के साथ भव्य राम मंदिर अयोध्या मे बनने को तैयार है| इस लोक चेतना की करवट के साथ भारतीय समाज और लोकजीवन एक नयी करवट लेगा| राम राज्य सपना नहीं हकीकत होगा | भगवान राम का अंतहीन संघर्ष और देवत्व भारत माता का नया अवगुंठन करेगा, ऐसी कामना है|

Lord Ram

आने वाले दस दिन के बाद स्वतंत्रता पर्व है|लंका विजय के बाद लक्ष्मण ने भगवान श्रीराम से अनुरोध किया था की आप स्वर्ण लंका के राजा बन जाइये| तब राम ने लक्ष्मण को समझाया था की “जननी जन्मभूमि च स्वर्गाद गरीयसी” अथार्त मातृभूमि और माता स्वर्ग से भी बड़कर है| आज पश्चिम की बाज़ारवादी  और भोगवादी मानसिकता को छोड़कर क्या आत्म निर्भर भारत का कोई नया व्याकरण तैयार किया जा सकता है?  अयोध्या से भारतीय संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों को एक नई अर्थनीति के साथ प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए, ऐसा मेरा मानना है क्योकि हमारा आजादी पर्व गाँधी और अन्य शहीदो की राम नाम नीति का ही कदाचित परिणाम था|

कोई भी समाज अपने महापुरुषों से प्रेरणा प्राप्त करता है, अपने इतिहास का सृजन करता है|लोक गाथाओ से लोक जीवन की बुनावट करता हे| तभी तो भगवान राम भारत की समन्वित और समावेशी संस्कृति के प्रतीक है|क्या जननी जन्मभूमीच्या का यह अर्थ नहीं है

जो भरा नहीं है भावो से, बहती जिसमे रसधार नहीं 

वह हृदय नहीं वह पत्थर है, जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं|

लेखक – विजय कुमार ढौंडियाल

 

 

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