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Monsoon Management: एक नई नीति की दरकार

Mansoon management : Needs a complete fresh look

भारत मे पिछले एक-दो दशक से मानसून की गति बहुत बदली है| आकस्मिताओं ने इसके चरित्र और स्वाभाव को काफी हद तक प्रभावित किया है|केदारनाथ आपदा इसी का एक उदहारण है | उस वर्ष 16 जून को अचानक बाढ़ आना कही से भी वर्षा के पारम्परिक पैटर्न का भाग नही था| बिहार और असम की बाढ़ हर वर्ष हमारे संसाधनों पर भारी बोझ बनती जा  है| क्या वर्षा के इस बदलते पैटर्न के लिए ग्लोबल क्लाइमेट ज़िम्मेदार है? कुछ वैज्ञानिक कभी कभी अल-नीनो के प्रभाव को भी इसका ज़िम्मेदार मानते है|
नदियों मे भयंकर बाढ़ के साथ साथ शेहरो मे पानी भर जाना इसकी
बानगी भर है| Monsoon Management : शहरी क्षेत्रों में उफान भरते नाले, तटबंध तोड़ती नदियां और शहरी गालिया सब बरसात मे लबालब भरे रहते है|ऐसा लगता है की हिमालय क्षेत्रों मे वर्षा का पैटर्न एक मुश्त बारिश से बदलकर छोटे छोटे पैकेट्स मे आकस्मिक वर्षा के रूप मे होता जा रहा है| दिल्ली मे हाल मे हुई वर्षा से बाढ़ का पानी मिंटो ब्रिज तक फैल गया| मिंटो ब्रिज अब बाढ़ का एक सूचकांक बन गया है |
असम की बाढ़ हर वर्ष डराती है, काज़ीरंगा मे भयंकर तभाही मचाती है और लाखो जीवन को पस्ट करती है| ऐसा लगता है की भारत को मानसून मैनेजमेंट की एक लॉन्ग टर्म पॉलिसी की आवश्यकता है जिसमे वर्षा के बदलते पैटर्न का संपूर्ण आलेख हो| बिहार की बाढ़ कोसी और गंडक नदियों की देन है जो की हिमालयी राज्य नेपाल से निकलती है| कुछ वर्ष पूर्व जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री का निवास भी बाढ़ की चपेट मे आ गया था| इसलिए जरूरी है की ग्लोबल क्लाइमेट चेंज, बढ़ते शेहरीकरण और परंपरागत कृषि मे आ रहे बदलाव, पेड़ो की अंधाधुंध कटाई आदि  समीकरणों को ध्यान मे रखते हुए एक नई नीति तैयार की जाये| केवल इमरजेंसी ऑपरेशनस के बदले, भारी निवेश के जोखीम को दरकिनार कर यह नीति तैयार की जानी चाहिए| आश्चर्य है की मानसून से जुडी हुई दक्ष मानव शक्ति हमारे पास नही है| इग्नू जैसी संस्थाएं आपदा मैनेजमेंट की तरह मानसून मैनेजमेन्ट पर छोटे बड़े पाठ्यक्रम चला सकती है| यह दक्ष मानवशक्ति मानसून मैनेजमेंट मे अपना योगदान कर सकती है| SDRF और NDRF को भी इन मानसून हॉटस्पॉट की जानकारी रखनी होगी और बर्षा के बदलते पैटर्न पर नज़र रखनी होगी|
भारत मे स्मार्ट सिटी परियोजना अनेक शेहरो मे गतिमान है| इन शेहरो का प्रबंधन नगर निकाय संस्थाये देखती है जिनकी आय बहुत कम है| थोड़ी सी बारिश से ही  प्रत्येक शेहर की सड़के लबा लब भर जाती है| स्मार्ट सिटी परियोजना मे शेहरो के वर्षा जल प्रबंधन और बदलते पैटर्न को भी समझना होगा| आवासीय छेत्रो मे पानी भर जाने से जमीन का धसकना व मकान धसने की घटनाये बहुत बड़ी है|विगत वर्ष सोलन हिमांचल मे कई सैनिक एक होटल मे खाना खाते वक्त पुश्ता देहने से जान गवा बैठे|

मानसून मैनेजमेंट को एक स्वतंत्र अध्यन मानते हुए इसमे एडवांस कोर्स शुरू किये जाने चाहिए | एक राष्ट्रीय नीति के निर्माण पर बहस हो जिसमे मीडिया, वैज्ञानिक और समाज के सभी वर्ग शामिल हो| मानसून हर वर्ष आएगा और बाढ़ की भयावक्ता भी बढ़ने की आशंका है | हमे इसके मैनेजमेंट के लिए शशक्त प्रयास करने की जरूरत है|

लेखक – विजय ढौंडियाल