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तीज पर मेरे मन की बात

तीज पर मेरे मन की बात

कल तीज का त्यौहार है| तीज सावन का हरियाली पर्व है| पहले परंपरा थी की गांव के आहते चौबारे मे नीम, बरगद जैसे पेड़ हुआ करते थे| तीज पर  इन पेड़ो पर झूले पड़ते थे|घर परिवार मे तरह तरह के पकवान बनते थे| प्रकृति की हरियाली के साथ व्यक्ति एकाकार होकर जीवन मे खुशियाँ बटोरता था| गौरी शंकर की पूजा का विधान था|

समय बदला, समाजशास्त्र बदला नीम बरगद की जगह छोटे बड़े मकान बनने लगे| समय की कुल्हाड़ी ने इस बदलाव को हवा दी| गांव सिमटते गये, शेहर बढ़ते गये और इसी के साथ जीवन की आपाधापी भी|उत्साह को समय के पतझड़ ने ढक दिया| मौसम ने भी वृक्ष, पेड़ो के आभाव मे अपनी रंगत दिखानी शुरू कर दी| परिणाम सामने है हम खोये खोये से प्रकृति से जुदा तन्हा तन्हा रहते है| रस्म अदायगी के रूप मे आज भी तीज का हरियाली पर्व हमारे सामने है| इस त्यौहार के बहाने आइये आज कुछ मन की बात कर ले|
तीज के पारम्परिक कलेवर के साथ क्या यह संभव है की हम विशेषकर महिलाये एक दूसरे को पंच पलव अर्पित करे| इसमे तुलसी,  गिलोय,  अश्वगंधा और नवगृह के संभावित पौधों का आदान प्रदान किया जा सकता है| ये घरेलू गमलो मे भी उग सकते है और घरेलु वस्तु की दृष्टि से भी उपयोगी है | घर की हरियाली भी खूब निखरेगी|अब बदले समय और समाज के रीती नीति के कारण तीज-त्यौहारो मे यह परिवर्तन जरूरी लगता है| अपार्टमेंट मे भी इस कार्य को अंजाम दिया जा सकता है|
भारत तीज त्योहारों की धरती रही है|पूजन कार्य मे भी अनेक अवसरो पर हरियाली बोई जाती है| वन संस्कृति मे हमारे पूर्वज रचे बसे थे|अब हर तीज त्यौहार के अवसर पर प्रत्येक नागरिक को पेड़ पौधे अपने घर आँगन मे लगाने चाहिए| प्रकृति चेतना से उसका भौतिक और भावनात्मक विकास दोनो ही होगा| संविधान मे नीति निर्देशक तत्वों मे इस लक्ष्य को महत्वता दी गई है|

अब जैव विविधता पर्व स्कूल, कॉलेज और समाज के हर वर्ग के स्तर पर मनाये जाने चाहिए| तीज की भावना के साथ तीज हर साल आएगी| घर के बड़े बूड़ो से बच्चे विशेषकर लड़किया इस संस्कार और संवेदना को भली भाती समझेंगे, इसी निवेदन के साथ अपनी मन की बात को विश्राम दे रहा हूँ|