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National Handloom Day: आइये मिलते हैं ऐसे ही कुछ हुनरमंदों से जिनके हुनर को दुनिया करती है सलाम

National Handloom Day

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आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से अपील की थी कि हमें हैंडलूम की अपनी समृद्ध परंपरा और हुनरमंद बुनकरों के हुनर को दुनिया के सामने लाना चाहिए, ताकि इस विधा को अपेक्षित गति मिल सके। आइये मिलते हैं ऐसे ही कुछ हुनरमंदों से जिनके हुनर को दुनिया सलाम करती है।

National Handloom Day:दुनिया में जलवा बिखेर रहे है बलविंदर

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बलविंदर सिंह के हाथों खड्डियों पर बनाए गए शॉल और मफलर की गर्माहट विदेश तक पहुंच गई है। 32 सालों के अपने इस सफर में वह आज बेहतरीन उत्पाद तैयार करने के साथ ही 70 से अधिक युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं। बलविंदर के शॉल और मफलरों के लिए अब उनका गांव मानकवाल अपनी अलग पहचान रखता है।

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बलविंदर सिंह खुद आठवीं पास हैं पर खड्डी चलाकर सालाना 25 से 30 लाख रुपये कमा रहे हैं। उनके पास कोई रजिस्टर्ड कंपनी नहीं है, जिसकी वजह से वह प्रत्यक्ष तौर पर निर्यात नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन दुनिया के अलग-अलग देशों में उनके मफलर और शॉल की डिमांड है। अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया आदि देशों से आने वाले एनआरआई उनसे यह उत्पाद लेकर जाते हैं। उनके पास अपनी 16 खड्डियां हैं और 50 अन्य खड्डियों से कांट्रेक्ट पर माल तैयार करवाते हैं।

National Handloom Day: 12 वर्ष की उम्र से शुरू करदिया था काम

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गोरखपुर के मोहम्मद सैफ ने कटवर्क का ऐसा बेडशीट तैयार किया है, जिसकी सफाई मशीन को भी मात देती है। उन्हें बीते वर्ष कटक में सर्वश्रेष्ठ बुनकर का पुरस्कार भी मिला है। 23 वर्षीय मोहम्मद सैफ यूं तो गोरखपुर में बीटेक कर रहे हैं, लेकिन महज 12 वर्ष की उम्र से पिता का हाथ बंटाने लगे थे। वह चौथी पीढ़ी के बुनकर हैं। सैफ ने वर्ष 2014 से कटवर्क की बेडशीट बनानी शुरू की तो देखते ही देखते बाजार में उनका हुनर बोलने लगा।

 

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