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New Education policy 2020 a decent approach : नई शिक्षानीति एक बहुआयामी परिवर्तन

NEW EDUCATION POLICY 2020 को केंद्रीय कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया है| लक्ष्य सौजन्य से – डिजिटल प्लेटफार्म यह है की अगले शिक्षा शत्र से इस बहुआयामी नीति को लागू किया जाये| मीडिया प्रसार माध्यमों मे यह शिक्षानीति ट्रेंड कर रही है| उम्मीद है की वर्ष 1986 की शिक्षानीति से यह अधिक कालजयी, समाजोन्मुख और छात्र समुदाय के समन्वित विकास का आधार बनेगी|

मेरे मस्तिस्क मे विद्या बनाम शिक्षा का द्वन्द है|आज नॉलेज को इकॉनमी माना जाता है| राष्ट्रीय जीडीपी मे शिक्षा पर निवेश और शिक्षा की उपलभ्धियो की चर्चा खूब होती है किंतु भारतीय संस्कृति और सभ्यता मे गुरुकुल की परंपरा रही है|गुरुकुल मे पड़ने वाले छात्र विद्या अध्यन करते थे जिससे उनका सर्वांगीण विकास होता था|

प्रसिद्ध ग्रीक दार्शनिक प्लेटो ने-“knowledge is virtue”कहा था| प्लेटो की यह भावना भारतीय दर्शन और सभ्यता के उस पक्ष को उजागर करती है जहाँ छात्रों की समग्र विकास की बात हो| विद्या( विजडम) केवल तोता रटंत का पर्याय नहीं हो सकती|विद्या अध्यन को योग, आरोग्य और जीवन के प्रत्यक्ष अनुभवों से जोड़कर देखे जाने की भारत की पुरानी परंपरा को फिर जीवंत करने का समय है|

अब समय तेजी से बदल रहा है| शिक्षा मात्र जीविकोपार्जन का माध्यम रह गयी है| उदारीकरण और वैश्वीकरण के दौर मे मैनेजमेंट साइंस की भरमार हो गई है|इसका मूल धर्म टैक्ट (tact) और येन केन प्रकारेण समाधान खोजना है| बड़ी बड़ी कंपनियों का दौर है और बड़े पे पैकेज इसके  बाय प्रोडक्ट है|

अब भारतीय युवा सीमाओं से बाहर पढ़ाई और रोजगार के लिए बड़ी संख्या मे पारगमन करते है| वे नई नई संस्कृतियों, मूल्य और विश्वासो से लैस होते है| युवा शक्ति एवं ऊर्जा के इस दौर मे कही कही यह अनुभव किया गया है कि यह छात्र फिर अपने वतन की और भी रुख नहीं करते है|वे शिक्षार्थी तो है पर कदाचित विद्यार्थी नही|

उम्मीद की जानी चाहिए की नयी शिक्षा नीति शिक्षा और विद्या दोनो के संस्कारो से युवा को बांधकर रखेगी|इसके लिए ज़रूरी है की शिक्षा का इंफ्रास्ट्रक्चर को महानगरो, शहरो, कस्बो और यहाँ तक की गॉव तक मे फ्रेश लुक दिया जाये| अगले दस वर्ष इस दिशा मे युवाओं की प्रतिभा, उनके रोजगार और उनके समग्र विकास की दृष्टि से परिवर्तनकारी होने चाहिये|

इसके साथ ही शिक्षकों की ट्रेनिंग और गुणवत्ता मे इज़ाफ़ा किया जाये|नयी शिक्षा नीति 3 से 6 वर्ष के बच्चो की फाउंडेशन शिक्षा पर बहुत बल देती है|यही इसका क्रन्तिकारी बदलाव है| 3 से 6 वर्ष के बच्चो की शिक्षा के लिए सवेदनशील शिक्षक चाहिए|एक्टिविटी मोड की शिक्षा भी जरूरी है| बच्चो को स्थानीय पेड़ पौधों, वनस्पतियो और खेल खेल मे जैव विविधता से भी जोड़ा जाना चाहिए|

इसी तरह कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर लचीली शिक्षा की वकालत की गई है| इसमे सर्टिफिकेट कोर्स, डिप्लोमा course, डिग्री कोर्स पढ़ाई के वर्षो के आधार पर दिए जा सकते है| यह दूसरा क्रन्तिकारी बदलाव है| यह इस अर्थ मे कालजयी है की नयी शिक्षा नीति इनोवेशन, डिज़ाइन और एंटरप्राइज संस्कृति को विक्षित एवं पोषित करती है|

आत्मनिर्भर भारत अभियान एक बड़ी चुनौती है| युवाओं मे स्किल डेवलपमेंट और देश के अंदर नये अवसरो का सृजन एक तात्कालिक चुनौती है| स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा दोनो मे ही केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किये है|अगला दशक इस शिक्षानीति के क्रियान्वयन के लिए मील का पत्थर साबित होगा|

परंतु असल मुद्दा यह है की देश की युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कारो से जुदा ना होने दिया जाये| वे विदेश मे रहते हुए भी अपने देश के युवाओं की मदद और मार्गदर्शन कर सकते है| वर्क लाइफ बैलेंस की दृष्टि से विद्या अपरिहार्या है| शिक्षा को इसका अंगभूत माना जा सकता है|नॉलेज इस इकॉनमी से पहले हमे प्लेटो के इस वाक्य को जरूर ध्यान मे रखना होगा- knowledge is virtue. यह virtue ही उसे अच्छा नागरिक, अच्छा चिंतक, अच्छा अभिभावक, अच्छा राष्ट्रभक्त और वासुधैव कुटुंबकम की भावना से जोड़े रख सकता है|

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लेखक – विजय कुमार ढौंडियाल

आईएएस (RETD)