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जनसंख्या नियोजन राष्ट्रीय विकास का मुद्दा है

जनसंख्या नियोजन

विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर आइये, कुछ नया विचार करे| भारत चीन के बाद जनसंख्या मे दूसरे पायदान पर है| यहाँ की करीब 54% आबादी युवा है| मोदी जी इस जनसंख्या को भारत का डिविडेंड कहते है| भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा पूरी दिनिया मे छाया है| सिलिकॉन वैली से लेकर विज्ञान तकनीक के छेत्र मे वह विदेशी विश्वविद्यालयो मे काम करता है| किन्तु तकनीक और डिजिटल डिवाइड के इस दौर मे यह विचारणीय है की यह डिविडेंड कितनी दूर तक चलेगा|
आत्मनिर्भर भारत मे मोदी जी इनोवेशन, विज्ञान प्रेरित विकास और नवाचार को राष्ट्रीय मूल्यों के रूप मे शामिल करते है| कोरोना के दौर मे करीब चार माह तक आर्थिक गतिविधिया धीमी पड़ गयी| जनसंख्या का एक बड़ा भाग शहरो से प्रति-पलायन करने लगा| एक बड़ी जनसंख्या के आगे भोजन और पैसे की समस्या आ गयी| सरकार ने नवंबर तक प्रधानमंत्री अन्न योजना का दायरा बढ़ाया| परंतु प्रश्न यह है की इस 80 करोड़ जनसंख्या को नवंबर के बाद जेब मे पैसे और भोजन कैसे मिलेगा| शासन प्रशासन को इस दिशा मे अति शीघ्र लघु, मध्यम और दीर्घ काल के लिए योजनाएं बनानी चाहिए|
एक चिंता यह भी है कि भारत की जनसंख्या का गुणात्मक विकास हो| स्किल डेवलपमेंट के तहत बदलते दौर की तकनीकों से वे परिचित हो| भारत मे वृद्धों की संख्या तेजी से बढ़ रही है| बढ़ती वृद्धों की आबादी से जनसंख्या मे भोजन पानी, स्वास्थ्य और सुविधाओ मे एक असंतुलन की आशंका जताई जा रही है| कुछ जनसंख्या विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगले एक दशक मे भारत की जनसंख्या विशेष कर वृद्धों की चीन से आगे निकल जाएगी|
तकनीक एवं विज्ञान ने जनसंख्या बहुलता के स्थान पर गुड़वक्ता पूर्ण जनसंख्या को एसैट माना है| समग्र जनसंख्या नीति के उदेश्यो को ध्यान मे रखकर इस मोर्चे पर फौरी कारवाही की आवश्यकता है| कोरोना व विभिन्न राष्ट्रों की संरक्षण वादी नीतियों के कारण इंडियन डायस्पोरा भी अपने मुल्क की और लौट रहे है|

लेखक – विजय ढौंडियाल