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SUSHANT SINGH RAJPUT CASE

Psychological Autopsy : सुशांत केस से पहले भी कुछ मामलों में हुआ है इस्‍तेमाल

Psychological Autopsy: जानिए क्या होती है साइकोलॉजिकल ऑटोस्पाई

Psychological Autopsy

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के आत्‍महत्‍या की गुत्‍थी सुलझने की बजाए उलझती ही जा रही है। सीबीआई इस मामले में अब साइक्‍लोजिकल आटोप्‍सी कराने की बात कह रही है। इस तकनीक का इस्‍तेमाल अब से पहले केवल दो ही मामलों में किया गया है। इनमें से एक बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों की आत्‍महत्‍या का मामला था, जबकि दूसरा सुनंदा पुष्‍कर की मौत की गुत्‍थी सुलझाने का था।

Psychological Autopsy: साइक्‍लोजिकल ऑटोप्‍सी क्या है ?

Psychological Autopsy

जांच एजेंसी इस प्रक्रिया के दौरान पीडि़त के करीबी लोगों से बातचीत कर ये जानने की कोशिश करती है कि पीडि़त के आखिरी दिनों में उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी। क्‍या उसमें किसी तरह से बदलाव आए थे, जिन्‍‍‍‍‍हें पीडि़त के करीबियों ने महसूस किया था।  क्‍या पीडि़त आत्‍महत्‍या के बारे में विचार कर रहा था या उसके मन में क्‍या चल रहा था।

Psychological Autopsy

उस वक्‍त वो किस तरह के तनाव से जूझ रहा था। इस तकनीक का सबसे बड़ा मकसद पीडि़त का स्‍टेट ऑफ माइंड या उसकी मेंटल कंडीशन के बारे में जानना होता है जिसकी वजह से वो अपनीजिंदगी को खत्‍म करने जैसा खौफनाक कदम उठाता है। इस तकनीक में पीडि़त की मेडिकल रिपोर्ट, यदि कोई हो तो, का भी गहन अध्‍ययन किया जाता है।

Psychological Autopsy : बुराड़ी कांड

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बुराड़ी कांड की ही बात करें तो इस मामले में साइकोलॉजिकल ऑटोस्पाय के जरिये ही यह पता चला था कि 11 आत्महत्याओं का मास्टर माइंड ललित था। उसके दिमाग में ऐसी चीजें चल रही थीं, जिसके चलते इतना बड़ा कांड हुआ। इसके जरिये ललित की मानसिक स्थिति का भी आकलन किया गया था। 30 जून 2018 को इस मामले के सामने आने के बाद हर कोई हैरान था।

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