Digital Akhbaar

Latest Hindi News

IMG 20200805 WA0023

IMG 20200805 WA0023

RAM RAJYA: An outstanding move for inclusiveness – (सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास) का नंबर 1 मॉडल

 

 

Ram Rajya today

Ram rajya एक लक्ष्य है एक गंतव्य है|यद्यपि वर्त्तमान सरकार ने इसे अपने घोषणा पत्र और चिंतन मे प्रमुखता दी है किन्तु एक राष्ट्र राज्य के रूप मे यह भारतीय मानस का हमेशा से एक प्रमुख विचार रहा है|गाँधी जी राम राज्य के प्रबल हिमायती थे|सत्य, अहिंसा और सरलता के रूप मे राम राज्य उनकी कल्पना और चिंतन का प्रमुख अंश रहा है|समानता, समता और व्यक्ति की प्रतिष्ठा इसके मूल मे रहे है| एक कविता की कुछ पंक्तिया इस और व्यापक इशारा करती है

सन्देश यहाँ मै नहीं स्वर्ग का लाया 

इस धरती को ही स्वर्ग बनाने आया|

इसमे मानव ममता के दाने बोने है

इसमे मानव समता के दाने बोने है|

राम राज्य मे ममता से अर्थ  प्रेम, स्नेह, दया और पर दुखकातरता से है|इसी प्रकार समता से गैर बराबरी  का ना होना और समाज के प्रत्येक व्यक्ति के पूर्णता की गारंटी है| यदि किसी प्रजातंत्र को राम राज्य की कसौटी पर तोलना हो तोह ममता और समता उसके मुख्य पासवर्ड होंगे|

Ram Rajya: A New Pillar Of Democracy 

भारतीय संविधान मे प्रजातंत्र को नागरिकों के लिए मुख्य लक्ष्य माना गया है|भारत ने आजादी और संविधान के साथ ही इस लक्ष्य के मील के पत्थर तैयार किये थे|सभी को एक एक वोट का अधिकार बिना जाती, धर्म, भाषा और लिंग पे विचार किये बिना दिया गया| संविधान की ब्याख्या के लिए स्वतंत्र न्याय पालिका की बात कही गई|राम राज्य क्योकि एक गंतव्य है (destination)  इसलिए भारत जैसे विविधता पूर्ण समाज मे राम राज्य एक विकासशील प्रक्रिया है|

Ram Rajya se aayega anand

Ram Rajya की स्थापना से देश मे आनंद की बयार बहेगी 

हमारे नेताओं ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप मे राम राज्य की भावना को महत्व दिया है किन्तु अभी बहुत कुछ किया जाना बाकि है|राम राज्य मे सामाजिक बराबरी वंचितों की पहरेदारी और आर्थिक अवसरो की बराबरी का लक्ष्य होना ही चाहिए|

पश्चिम मे जहाँ विचारको ने maximum good of maximum number का सिद्धांत दिया वही भारत मे त्यक्तेन  मा भुंजियीथा अथार्त एक रोटी दूसरे के लिए भी रखने का सन्देश दिया|यह भारतीय दृष्टि सर्वजन आधारित है|रामराज्य की हमारी कल्पना वेदो और भारतीय संस्कृति के सभी ग्रंथो से कमोवेश निकलती है| त्याग करते वे भोग की इच्छा यह महत्वपूर्ण सन्देश है राम राज्य का| राम की यही चेतना एक प्रशाशनिक ढांचा है| राम राज्य केवल एक धर्मिक मामला नहीं है बल्कि सभी जातियों, धर्मो और मनुष्यों के सरोकारों को समेटने का प्रयास है|

आजादी के बाद 40वे और 50वे दशक मे अनेक देश स्वतंत्र हुए| शोषणवादी व साम्राज्यवादी शक्तियों से अनेक देश मुक्त हुए|प्रजातंत्र की हवा यत्र तत्र सवत्र देखने को मिली|पूरी दुनिया प्रजातांत्रिक पक्ष रखने वाली और साम्यवादी सत्ताओ मे बँट गयी| भारत गुट- निरपेक्ष ही रहा|लोक कल्याणकारी राज्य का कैनवस तैयार किया गया और सभी नीतियों को इसके व्यापक फलक पर आकार दिया जाने लगा|

राम राज्य केवल एक सुखद कल्पना नहीं है यह एक चुनौती है|अंग्रेज़ों की दी वी माई बाप व्यवस्था से रामराज्य का लक्ष्य नहीं प्राप्त किया जा सकता|शासक को सेवा धर्मी बनना पड़ेगा|नौकरसाही की लातसाहिबी को कम करना होगा|न्यायालयों की माय लार्ड संस्कृति को अलविदा कहना होगा| आम आदमी सबसे बड़ा वी आई पी होना चाहिए| लोक कल्याणकारी राज्य तभी जनता जनार्दन से जुड़ पाएगा|

राम राज्य समय समय पर भारती नव चेतना के उभार के रूप मे देखा गया हे|यहाँ एक संकट को भी लेखांकित करना जरूरी है| पूरी दुनिया वैश्वीकरण और मार्केटिंग के दौर मे है| साम्यवादी जनतंत्र से लेकर राजाओं, बादशाहो और खलीफाओ की सल्तनते मौजूद है| भारत राम राज्य के दर्शन और भावना के अनुरूप पुरे विश्व को आध्यात्मिक प्रजातंत्र का पाठ पड़ाकर विश्व गुरु की राह मे दो पग आगे बड़ा सकता है|राष्ट्र की रामराज्य की यात्रा लम्बी है| निष्ठाएं भी कमजोर है, देश मे अंतर विरोधो की भी कमी नहीं है |नेताओं, अधिकारियो और समाज के बड़े लोगो के प्रति ट्रस्ट डेफिसिट भी बहुत अधिक है|

ट्रस्ट डेफिसिट का परिणाम सुशासन मे गिरावट है|वोट के अधिकार के अलावा अवसरो की असमानता से सोशल तनाव व गुस्सा इधर के वर्षो मे कई गुना बड़ा है| ममता और समता के पैमाने कमजोर पड़ रहे है|आत्म निर्भर भारत एक अच्छी सम्भावना हो सकती है किंतु इसके लिए ‘ममता और समता’के साथ ही आदमीयत को सलाम करना होगा| व्यक्ति से समाज बनता है और समाज से राष्ट्र व देश| सभी रामराज्य की भावना के अनुरूप तभी फलेंगे फूलेंगे  जब एक समावेशी समाज की रचना होगी| सच है की रामराज्य एक यात्रा है, गंतव्य अभी दूर है और इसके टूल्स को अयोध्या मे राम मंदिर के भूमि पूजन के साथ नये तेवर देने की जरूरत है|

सरकार की कोशिश है की सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास| यही राम राज्य के समता और ममता की चुनौतियां भी है और यात्रा पथ के पथेय भी|

लेखक – विजय ढौंडियाल

Admissions: पड़ाव नहीं गंतव्य है