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INCREASING SCREENTIME: आपदा 1 अवसर अनेक (Bane or Boon)

Screentime increasing due to online classes and new education policy

नई शिक्षा नीति मे ऑनलाइन शिक्षा को बहुत महत्व दिया गया है| कोरोना काल मे यू भी चार माह तक घरों मे कैद रहने से बच्चो मे ही क्या बड़ो मे भी स्क्रीन टाइम के प्रति बढ़ोतरी दर्ज की गई है| स्कूली बच्चो का होम वर्क और उसका निस्तारण भी मोबाइल पर किया जा रहा हैं|

Parents sharing screentime with their children

माता पिता बच्चो के साथ ही स्क्रीन टाइम मे इन्वॉल्व है

स्क्रीन टाइम के बढ़ने के अनेक कारण है|होम वर्क के अलावा बच्चो मे गेम्स खेलने की आदत, टीवी देखने की आदत भी उनका स्क्रीन टाइम बड़ा रही है| इसी तरह युवावर्ग अपनी कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल के चलते औसतन 10 से 12 घंटे स्क्रीन पर बिता रहे है| स्क्रीन के मोहपाश ने बड़े बूड़ो को भी नहीं छोड़ा है| अकेलेपन के निपटान का यह तरीका समाज के हर वर्ग मे व्याप्त हो गया है|

Screentime in corporate

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नॉलेज इकॉनमी ने सोशल मीडिया की जरूरते बहुत बड़ाई है|कहना ना होगा स्क्रीन टाइम एक जरूरत है पर इसे मुसीबत की सीमा तक ले जाना घातक हो रहा है| दुनिया मे इस समय आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, डाटा चाहत के प्रति रुझान बड़ रहा है| नॉलेज इकॉनमी का आधार भी यही है|सड़को, पार्को, रेल व जहाजों मे सर्वत्र मोबाइल पर सक्रिय लोग अपना स्क्रीनटाइम को एक आर्थिक उत्पाद समझते है|

Screentime

मेट्रो मे सफर के दौरान मोबाइल पर ब्यस्त युवा 

स्क्रीन पर समय बिताने का यह तरीका पिछले दसको मे ही काफी बड़ गया था| अब तो कदाचित इसके प्रतिप्रभाओ पर ध्यान देना ज़रूरी है|कोरोना और मोबाइल ने हर व्यक्ति को अकेला कर दिया है| मोबाइल/स्क्रीन व टीवी उसके अकेले पन के साथी है| मनुष्य हमेशा से सामाजिक प्राणी रहा है| उसके दुख दर्द, हसीं ख़ुशी और संवेदनाओ मे समाज साक्षी रहा है|समाज से उसे जीवंत ऊर्जा मिलती रही है|

स्क्रीन के यह उपकरण सामाजिक सम्बन्धो और संवेदनाओ के प्रतीक नहीं हो सकते|पक्षी भी शाम को अपने घोसले की और लौटना चाहता है| स्क्रीन टाइम पर आठ-दस घंटे बिताने वाले युवाओं, कंपनी के मैनेजर्स और समाज के हर तबके को यह सोचना चाहिए की स्क्रीन की सीमा रेखा कहा है और इसी नजरिये से अपनी वर्क लाइफ बैलेंस को ठीक रखना चाहिए|

SCREENTIME :बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चो की सेहत पर भारी

बात बच्चो के होमवर्क से निकली है तोह दूर तलक जाएगी|होम वर्क के नाम पर बच्चो को इस नई संस्कृति से परिचित कराने का प्रभाव यह होगा की यह पीढ़ी भविष्य मे पूर्णता स्क्रीन टाइम पर आधारित लाइफस्टाइल को ही महत्व देगी|स्क्रीन पर लगातार रहने से उसकी आँखों, उसके शरीर और मनोविज्ञान पर भविष्यगत प्रभाव पड़ेगा|जाहिर तोर पर उन्हें अपने लाइफस्टाइल को स्क्रीन टाइम से हटा कर भी महत्व देना होगा|

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SCREENTIME :स्क्रीन टाइम बन सकता है 1 अवसर

स्क्रीन टाइम हमारी मजबूरी के साथ साथ अवसरो का जन्मदाता भी है| क्योकि भविष्य मे आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और डाटा/सूचनाओं का नया संसार होगा जिसके चारो और व्यापार, मार्केटिंग और देश दुनिया के कामों मे भागीदारी भी बढ़ेगी|
ऑनलाइन मीटिंग, सम्भोधन व कंपनियों के बोर्ड रूम का गठन सबसे यही बात पुश्ट होती है की ज़माने कि बयार अब ऑनलाइन दुनिया के साथ है|

 

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स मे खोज और एप्लीकेशन इसे और हवा देंगे| यही कलयुग का संकट मोचक होगा| बस समझने की बात इतनी है की हम अपनी लाइफस्टाइल को इसके अनुकूल बनाये और सीमा रेखाओ के मनोविज्ञान को ठीक से समझे| मशीन मनुष्य की संवेदनाओ व इमोशनल विजडम का स्थान नहीं ले सकती|

स्क्रीन टाइम के साथ जीना समय की मांग है और एक अनिवार्यता भी|अतः स्क्रीन टाइम को अच्छे स्वास्थ के साथ उपयोग और उपभोग करना जरूरी है|लगातार स्क्रीन और बैठने के स्थान पर हर घंटे एक नये एक्टिविटी को किया जाये ताकि आँखो पर और उंगलियों पर जोर ना पड़े| इससे उपजने वाला एकांत को तोड़ने के लिए समूह मे बाचचीत आरम्भ की जाये|

इस सम्बन्ध मे मेडिकल मे नए क्लिनिक और रिसर्च को प्रमोट किया जाये|संतुलन ही इसकी औषधि | तकनीक संस्कृति और सभ्यता की पुरोधा है| इसके साथ संतुलन मे जीना यही मूल मंत्र है| विवेक इसका सहचर बनना चाहिए|

https://timesofindia.indiatimes.com/readersblog/highway-of-thoughts/onlineeducation-boon-or-bane-16134/