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स्किलिंग भारत के भविष्य का पासवर्ड है

भविष्य का पासवर्ड

स्किलिंग,  रि-स्किलिंग और अप-स्किलिंग भारत के भविष्य का पासवर्ड है|वर्तमान सरकार ने पिछले समय से ही स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय का गठन कर यह संकेत दे दिया था कि भारत को जॉब क्रिएटर की जरूरत है ना की जॉब सीकर्स की| इसके लिए सरकार द्वारा सभी मंत्रालयों की स्कीम्स को पुनर्गठित कर युवाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया गया है|

यह जानकारी का विषय है की भारत मे करीब 45% बेरोजगारी बढ़ गई है|यह बेरोजगारी सरकारी नौकरियों और प्राइवेट नौकरियों में दोनों जगह दिखाई देती है| सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी , जो रोजगार के आंकड़ों को संतुलित करती है ने अवगत कराया है की पिछले त्रैमास में रोजगार की दर और संख्या कुछ बड़ी है| इसका मुख्य कारण गांव वापसी के कारण किसानों का कृषि क्षेत्र में धान और अन्य फसलों का रोपण है| कुछ विशेषज्ञों का यह भी मत है कि आने वाले दिनों में जो मजदूर कामकाज छोड़ अपने गांव को लौटे हैं वे पुनः कोरोना की मार कम होने पर शहरी इलाकों को लौटेंगे और रोजगार पुनः गति पकड़ेगा| यह स्थिति भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में है| आर्थिक मंदी कोरोना के प्रति प्रभाव के रूप में विश्व की सभी अर्थव्यवस्था और रोजगार माध्यमों में देखने को मिली है|भारत में टेक्सटाइल,  रियल स्टेट, सीमेंट,  लोहा जैसे 13 प्रमुख कोर सेक्टर में यह गिरावट देखी गई है |
स्किल डेवलपमेंट बाजार अर्थव्यवस्था और वर्तमान युग धर्म की सच्चाई है|आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी यही मंत्र हैं| यह सत्य है की सरकारी क्षेत्र में नौकरियों की संख्या काफी कम हुई है| कोरोनावायरस के कारण क्वॉरेंटाइन सेंटर की मांगबढ़ने से नियमित अध्यन – अध्यापन भी प्रभावित हुआ है| आज पूरी  दुनिया में युवाओं की स्किल मैपिंग एक प्रमुख मुद्दा है|भारत में भी इसकी आवश्यकता सरकार के तमाम प्रयासो में दिखती है|आवश्यकता यह है कि इस स्किल डेवलपमेंट व्यवसाय को पूरी शिद्दत के साथ हवा दी जाये और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास किये जाये | इसमें नीति निर्माता विश्वविद्यालय,  प्रौद्योगिकी संस्थान सभी को अपनी भूमिका अदा करनी होगी| अब नई नौकरियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा प्लानिंग, प्रकृति पर्यावरण के सहज विकास के साथ हेल्थ सेक्टर मे आने की संभावना है| इसलिए देश के युवाओं को चाहिए कि वे अधिकाधिक विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में अपनी स्किल्स को बढ़ाये|

स्किलिंग, रि -स्किलिंग, अप -स्केलिंग एक गतिशील अवधारणा है| बदलते कॉम्पिटिटिव माहौल में केवल एक स्किल के सहारे नहीं जिया जा सकता|हमें लगातार अपनी स्किल्स को बढ़ाने की ओर तत्पर रहना होगा तभी दुनिया के बदलते माहौल में हम खड़े हो सकेंगे| आत्म निर्भर भारत अभियान का एक संदेश यह भी है कि हम स्थानीय स्तर पर उत्पादन की संस्कृति को पैदा करे और लोकल टू ग्लोबल,  सैंपलिंग टू  मैन्युफैक्चर और सेवा सेक्टर को बढ़ाते हुए एक इंटीग्रेटेड कार्य संस्कृति को पैदा करे| प्रधान मंत्री जी जो लोकल टू ग्लोबल का नारा देते हैं यह आत्म केंद्रित अवधारणा नहीं है| लोकल उत्पादों के लिए वोकल बन कर हमे विश्व मे उन्हें आइडेंटिटी प्राप्त करनी होगी और यही नयी स्किल्स काम आएँगी|

लेखक – विजय कुमार ढौंडियाल