इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद और मथुरा सहित यूपी में बंदरों के बढ़ते आतंक पर बनी SOP के तहत हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को होगी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद व मथुरा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में बंदरों के बढ़ते आतंक एवं मानव-बंदर संघर्ष के गंभीर मुद्दे को लेकर तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने विनीत शर्मा एवं प्रजाक्ता सिंहल की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से मिली जानकारी के बाद यह आदेश दिया है।
याचिका में बंदरों के बढ़ते आतंक को रोकने की मांग की गई है। अगली सुनवाई छह अप्रैल-2026 को होगी। राज्य की ओर से न्यायालय को बताया गया कि रीसस मकाक (बंदरों की एक प्रजाति) की संख्या, उनके हाटस्पाट क्षेत्रों एवं मानव-बंदर संघर्ष की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने हेतु विस्तृत सर्वेक्षण आवश्यक है। इसके लिए लगभग एक वर्ष का समय अपेक्षित होगा।
यह भी बताया कि उच्च स्तरीय समिति गठित हो चुकी है तथा वर्तमान एसओपी के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि वर्तमान एसओपी के अंतर्गत जिला स्तर पर अब तक उठाए ठोस कदमों का विवरण शपथपत्र के जरिये दिया जाए।
विशेष रूप से गाजियाबाद एवं मथुरा जनपदों में की गई कार्रवाई के साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों मे किए गए उपायों का विस्तृत एक्शन प्लान अगली तिथि से पूर्व न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। याचीगण की तरफ से अधिवक्ता पवन तिवारी, आकाश वशिष्ठ व राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल तथा विपक्षी नगर पालिका परिषद मुरादनगर के अधिवक्ता बालेश्वर चतुर्वेदी ने पक्ष रखा।

