उत्तराखंड निर्माण कार्यों का कुल राशि 9047 करोड़ से अधिक

उत्तराखंड अब वेतन, पेंशन और ऋण भुगतान के भारी बोझ से दबे वार्षिक बजट में निर्माण, विकास कार्यों और कल्याण योजनाओं के लिए अधिक धनराशि झटक रहा है। चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 में बीते वित्तीय वर्ष की तुलना में निर्माण कार्यों के लिए 1881 करोड़ और सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 347 करोड़ राशि अधिक जुटाई गई। यह सबकुछ वित्तीय संसाधन बढ़ाने की चाह या नए करों के बल पर नहीं हुआ।15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर केंद्रीय सहायता में वृद्धि और केंद्रपोषित योजनाओं ने बजट को गेमचेंजर बनाकर उत्तराखंड को संवरने का अवसर दिया है। प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष में बड़े निर्माण कार्यों के लिए 8798.49 करोड़ और लघु निर्माण कार्यों के लिए 248.86 करोड़ की व्यवस्था की गई है। निर्माण कार्यों का कुल राशि 9047 करोड़ से अधिक हो गई है। बीते वर्ष निर्माण कार्यों के लिए 15 प्रतिशत धन बजट में प्राप्त किया गया था।

इस वर्ष यह हिस्सेदारी बढ़कर रिकार्ड 16.07 प्रतिशत हो गई है। यद्यपि वेतन-भत्तों, पेंशन, ब्याज राशि के रूप में खर्च में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्य कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर 17350.21 करोड़ और पेंशन मद में 6703.10 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। वेतन, भत्ते, मजदूरी समेत अधिष्ठान खर्च 27.18 प्रतिशत है। पेंशन खर्च 12 प्रतिशत से अधिक है। ब्याज और लाभांश के रूप में 9.18 प्रतिशत बजट राशि खर्च हो रही है। इन बढ़ते खर्चों के कारण राज्य के निर्माण कार्यों के लिए धनराशि बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो गया था।

15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर पांच वित्तीय वर्षों तक राज्य को 89845 करोड़ की राशि मिलनी है। राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर 2021-26 तक राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 28,147 करोड़ की राशि स्वीकृत है। बीते दो वर्ष की यह राशि मिल चुकी है। तीसरे वर्ष में 7100 करोड़ से अधिक राशि मिल रही है। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में हर वित्तीय वर्ष में राज्य को करीब 9446.80 करोड़ की राशि मिल रही है। आपदा प्रबंधन मद में 5178 करोड़, शहरी व पंचायती निकायों के लिए 4181 करोड़ की राशि दी जा रही है।केंद्रपोषित योजनाओं और बाह्य सहायतित योजनाओं के रूप में प्रदेश को सहायता मुहैया कराने में केंद्र की मोदी सरकार ने दरियादिली दिखाई है।केंद्रीय सहायता ने उत्तराखंड के विकास को नए आयाम दिए हैं। अब यह प्रदेश सरकार पर निर्भर है कि वह कितनी तत्परता से इस सहायता का लाभ उठाती है। वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने भी केंद्र की इस उदारता का जिक्र अपने बजट भाषण में भी किया।

उन्होंने बताया कि 2012-13 से 2016-17 तक कुल 275.88 करोड़ का अनुदान केंद्र सरकार से प्राप्त हुआ था। 2017-18 से 2021-22 तक 55841.03 करोड़ का अनुदान मिला। प्रदेश को इस अवधि में औसत वार्षिक अनुदान 11168.21 करोड़ रुपये प्राप्त हो सका है। बाह्य सहायतित परियोजनाओं के मद में अप्रैल, 2021 से 31 मई, 2022 तक करीब 14387 करोड़ की सौगात केंद्र ने दी है। यही नहीं इस वित्तीय वर्ष में भी अवसंरचना विकास के लिए 894 करोड़ की राशि पंूजीगत सहायता के रूप में स्वीकृत की गई।

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