बरेली को पहली बार भाजपा ने दो राज्यसभा टिकट दिए हैं, जिसमें धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार शामिल हैं। यह कदम रुहेलखंड में सपा के पीडीए फार्मूले का मुकाबला करने और पिछड़ा वर्ग को साधने की भाजपा की रणनीति का हिस्सा है।
पीडीए फार्मूले के सहारे सपा विधानसभा चुनाव में रुहेलखंड में घुसपैठ न कर सके, इसके लिए भाजपा ने पिछड़ा कार्ड के जरिये अपने गढ़ में पुराने मजबूत पत्थर लगा दिए। सोमवार को पार्टी ने आंवला विधायक एवं पशुधन विकास मंत्री धर्मपाल सिंह (लोधी) व श्रुति गंगवार को राज्यसभा की ओर बढ़ा दिया।
इससे इतर, धर्मपाल व श्रुति चुपचाप दिल्ली में बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहे थे। 24 सितंबर को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी वहीं थे। माना जा रहा कि उसी दौरान नाम तय हो गए थे।
पिछली बार भाजपा ने बदायूं के बीएल वर्मा को पार्टी ने राज्यसभा भेजा, फिर केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा बनाया था। वह इस बार भी भरपूर आत्मविश्वास में थे कि दोबारा टिकट मिलेगा। इस तैयारी में अपनी डायरी में पांच व छह अक्टूबर की तारीखें खाली रखी थीं।
उनकी उम्मीद से विपरीत अंदरखाने द्वंद्व जोर पकड़ता गया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकारा कि एटा के कद्दावर लोधी नेता और बीएल वर्मा के बीच प्रतिद्वंद्विता नुकसान के मुहाने तक पहुंच सकती थी।
इस आशंका की आहट में पार्टी नेतृत्व ने विकल्प के तौर पर सजातीय धर्मपाल सिंह का नाम तय कर दिया। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से हैं, पांच बार विधायक रह चुके।
उनके नाम की घोषणा के बाद बीएल वर्मा के राजनीतिक भविष्य के कयास लगाने (लगने ) लगे, 25 नवंबर को उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। जिले से दूसरी प्रत्याशी श्रुति गंगवार झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं, जो आठ बार बरेली के सांसद रह चुके।
वह चुनावी राजनीति के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े कुर्मी चेहरे के रूप में स्थापित हो चुके थे। उन्हें 31 जुलाई 2024 को राज्यपाल बनाया गया, तब सजातीय नेतृत्व संभालने के लिए श्रुति गंगवार क्षेत्र में आ गईं।
आईआईटी रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग कर चुकीं श्रुति की सक्रियता बहेड़ी क्षेत्र में बढ़ी, जिसके बूते उनके आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने के कयास लग रहे थे।
उससे पहले पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का टिकट सौंपकर संकेत दे दिया कि ‘संतोषपूर्ण नेतृत्व’ को महत्व मिलता रहेगा। श्रुति के जरिये संगठन ने महिला नेतृत्व एवं नये दौर की नेता को कमान सौंपने का संदेश भी दिया है।
टिकट घोषित होने के बाद वह लखनऊ रवाना हो गईं। उन्होंने फोन पर बातचीत के दौरान संगठन नेतृत्व का आभार जताया। धर्मपाल सिंह पहले ही लखनऊ पहुंच गए थे।
मंडल में पिछड़ा वर्ग पर केंद्रित राजनीति
मंडल में 25 विधानसभा सीटें हैं। इनमें बरेली जिले की नौ में पांच (आंवला, भोजीपुरा, मीरगंज, बहेड़ी, भोजीपुरा), शाहजहांपुर की छह में दो (तिलहर, जलालाबाद), पीलीभीत की चार में तीन, बदायूं की छह में चार सीटों पर पिछड़ा वर्ग के मतदाता निर्णायक साबित होते हैं।
इसे ध्यान में रखते हुए भाजपा अपने पिछड़ा वर्ग कैडर (लोधी, कुर्मी, शाक्य-मौर्य) को मजबूत करने में जुटी है। जून में पूरनलाल लोधी को क्षेत्रीय अध्यक्ष व दुर्विजय सिंह शाक्य को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया था।
पिछले विधानसभा चुनाव में मंडल की 20 सीटें जीतने वाली भाजपा नहीं चाहती कि सपा पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) फार्मूले से किसी प्रकार की घुसपैठ कर सके।
आंवला व बहेड़ी में नये समीकरण बनेंगे
धर्मपाल सिंह ने आंवला से अपनी राजनीति शुरू की, इसी सीट पर पांच बार जीते। यदि वह राज्यसभा पहुंचते हैं तो क्षेत्र में नये समीकरण बनेंगे। उन्हें उच्च सदन की राह तैयार करने वाली भाजपा अपने परंपरांगत सामान्य वोटरों को भी संतुष्ट करने के लिए प्रयोग कर सकती है। बहेड़ी में दावेदारी कर रही श्रुति गंगवार का राज्यसभा टिकट होने के बाद वहां भी नये चेहरों का दम परखा जाएगा।

