औली में नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप कल से, सेना व आईटीबीपी सहित 17 टीमें ले रही हैं भाग

विश्व प्रसिद्ध औली में नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप और विंटर कार्निवल आज से शुरू हो रहा है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज इसका उद्घाटन करेंगे। सेना, आईटीबीपी सहित 17 टीमें भाग ले रही हैं। कम बर्फबारी के बावजूद आयोजकों ने रणनीति बदली है। यह आयोजन उत्तराखंड को शीतकालीन खेलों की राष्ट्रीय राजधानी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।

विश्व प्रसिद्ध शीतकालीन खेल केंद्र औली नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप व विंटर कार्निवल के आयोजन को सज चुका है।

16 फरवरी तक चलने वाली चैंपियनशिप का उद्घाटन शुक्रवार को रंगारंग कार्यक्रमों के बीच पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज करेंगे।

पर्यटन विभाग, गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) और विंटर गेम्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस चैंपियनशिप में सेना, आइटीबीपी व सीआरपीएफ समेत देश के विभिन्न राज्यों से 17 टीम प्रतिभाग कर रही हैं।

इस वर्ष चैंपियनशिप में मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है। विंटर कार्निवल के आयोजन इस चैंपियनशिप को और भव्य बना दिया है।

उत्तराखंड के स्कीइंग कोच विकेश डिमरी ने बताया कि उत्तराखंड से 35 खिलाड़ियों के अलावा विभिन्न राज्यों के 300 से अधिक खिलाड़ी, टीम मैनेजर व कोच औली पहुंच चुके हैं।

हालांकि, इस बार प्रकृति ने थोड़ी चुनौती पेश की है। कम बर्फबारी के चलते आयोजकों ने रणनीति में बदलाव कर स्की माउंट्रेनिंग की स्पर्धाएं दस नंबर टावर के पास स्थित पुराने स्लोप में कराने का निर्णय लिया है।

आइटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट नानक चंद ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले 1,350 मीटर लंबे व 40 मीटर चौड़े ‘फिस’ स्लोप (दक्षिणमुखी नंदा देवी स्लोप) पर सलालम व ज्वांइट सलालम के साथ स्नो बोर्ड की रेस आयोजित होगी।

  • बताया कि खिलाड़ियों के उत्साह को देखते हुए पहली बार सुबह सात बजे से ही स्पर्धाएं शुरू कर दी जाएंगी।

विंटर गेम्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय स्की कोच अजय भट्ट ने बताया कि अल्पाइन स्कीइंग, स्नो बोर्ड, स्की माउंटेनियरिंग, स्नोशू और मैराथन आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेंगे

उत्तराखंड को शीतकालीन खेलों की राष्ट्रीय राजधानी के रूप में स्थापित करेगा यह आयोजन

विंटर गेम्स एसोसिएट्स आफ उत्तराखंड के अध्यक्ष हर्षमणि व्यास ने कहा कि औली की बर्फीली वादियों का यह उत्साह सिर्फ एक खेल आयोजन ही नहीं, खेलों में उत्तराखंड के बढ़ते दखल का प्रतीक है। यह आयोजन प्रदेश के युवाओं, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। साथ ही उत्तराखंड को शीतकालीन खेलों की राष्ट्रीय राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा।

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