हरिद्वार में लापता कांवड़ यात्रियों को उनके परिवार वाले लगातार ढूंढ रहे हैं। गरीब परिवार बार-बार पुलिस को फोन करके जानकारी ले रहे हैं। वे खुद भी पंपलेट लेकर हरिद्वार की सड़कों पर भटक रहे हैं मंदिरों और स्टेशनों पर पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस गंगा और गंगनहर में तलाश कर रही है लेकिन लापता लोगों को ढूंढना मुश्किल हो रहा है।
लापता कांवड़ यात्रियों के स्वजन कई बार हरिद्वार आकर तलाश कर चुके हैं। अधिकांश निम्न आर्थिकी वर्ग से संबंध रखते हैं। ऐसे में वे हर तीन-चार दिन बाद हरिद्वार के पुलिस कंट्रोल रूम, कोतवाली प्रभारी के सीयूजी नंबर पर काल करते हैं। उनका अगला सवाल यही होता है कि सर मेरे बेटे या भाई का कुछ पता चला क्या।
पुलिसकर्मी नाम पता और गुमशुदगी की तारीख पूछते हैं। घर से हरिद्वार रवाना होने से लेकर गुम होने और गुमशुदगी की दिनांक कई बार दोहराने के चलते वे एक सांस में बता देते हैं। पुलिस उन्हें दिलासा देती है कि तलाश की जा रही है। स्वजन एक फिर उम्मीद लगाकर दो-चार दिन गुजारते हैं और फिर यही क्रम दोहराया जाता है।
खुद भी बहा रहे पसीना
कांवड़ यात्रियों के स्वजन हाथ में पंपलेट लेकर खुद भी हरिद्वार की खाक छान रहे हैं। हरकी पैड़ी के साथ ही मनसा देवी मंदिर, चंडी देवी मंदिर, मायादेवी मंदिर, दक्ष प्रजापति कनखल के अलावा रेलवे स्टेशन और रोडवेज अड्डे पर रोजाना किसी न किसी कांवड़ यात्री के स्वजन दस्तक देने पहुंचते हैं। हरिद्वार से कुछ कांवड़ यात्री नीलकंठ भी जाते हैं, इसलिए कुछ स्वजन नीलकंठ तक भटक रहे हैं।
पुलिस की तलाश गंगा से गंगनहर तक
हरकी पैड़ी के प्रमुख घाटों के अलावा ज्वालापुर तक करीब 20 से ज्यादा घाटों पर कांवड़ यात्रियों की भीड़ के दौरान जल पुलिस के गोताखोरों ने सैकड़ों की संख्या में शिवभक्तों को डूबने से बचाया। कई कांवड़ यात्रियों के डूबने का पता ही नहीं चल पाता है।
पुलिस का मानना है कि गंगा की मुख्य धारा पर बने नमामि गंगे घाट पर लापता होने वाले कांवड़ यात्रियों का शव मिलना भी अंसभव होता है। फिर भी किनारों और अगले जनपदों में लापता कांवड़ यात्रियों के फोटो भेजे जा रहे हैं। दूसरी तरफ गंगनहर में पथरी पावर हाउस, आसफनगर और मोहम्मदपुर झाल पर भी लापता कांवड़ यात्रियों के फोटो पुलिस की ओर से भेजे गए हैं। कुछ स्वजन भी फोटो लेकर झाल पर पहुंच रहे हैं।

