केंद्रीय बजट और मनरेगा कंपोनेंट…2027 के चुनाव के लिए इन मुद्दों पर BJP बना रही मजबूत रणनीति

केंद्र की मोदी सरकार का नया बजट और इसमें मनरेगा के स्थान पर लाए गए वीबी जीरामजी के लिए बजट की बड़ी धनराशि उत्तराखंड की राजनीति में सत्तापक्ष के लिए तलवार और ढाल, दोनों बनने जा रही है। भाजपा के निशाने पर कांग्रेस है।

मनरेगा को लेकर गांव-गांव में मोर्चा खोलने जा रही मुख्य विपक्षी पार्टी के मंसूबे विफल करने को सत्ताधारी दल बजट में वीबी जीरामजी के साथ यथावत रखे गए मनरेगा कंपोनेंट को लेकर पलटवार की तैयारी में है।

भाजपा के सांसदों एवं विधायकों के साथ प्रदेश संगठन एवं आनुषंगिक संगठन को बजट की इन सभी खूबियों को लेकर प्रदेशभर में मोर्चा संभालने को कहा गया है।

उत्तराखंड की राजनीति के अखाड़े में केंद्रीय बजट भाजपा का बड़ा दांव होगा। मोदी सरकार के बजट में गुलाबी घोषणाएं तो नहीं दिखीं, लेकिन विकसित भारत का सपना और उसे जमीन पर उतारने का दीर्घकालिक एजेंडा सामने रखा गया है।

केंद्र व उत्तराखंड में डबल इंजन सरकार का लक्ष्य विकसित भारत के साथ विकसित व आत्मनिर्भर उत्तराखंड है। प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

राज्य के बजट से पहले केंद्रीय बजट में पूरे देश के साथ इस हिमालयी प्रदेश में भी रेल, सड़क, आपदा प्रबंधन, पेयजल समेत अवसंरचनात्मक सुविधाओं की रफ्तार बढ़ाने की उम्मीदों को और हवा दी गई है।

प्रदेश में रेल सुविधाओं के विस्तार को 4700 करोड़ से अधिक बजट केंद्र ने रखा है। शहरी निकायों और पंचायतों की झोली में अधिक वित्तीय सहायता आई है। महिला सशक्तीकरण, युवाओं की शिक्षा, उद्यमिता एवं नवाचार में भागेदारी बढ़ाने के बजटीय उपायों ने भाजपा में नया जोश भरा है।

भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी युद्ध में यह अहम मुद्दा होगा। मनरेगा समाप्त करने के विरोध में कांग्रेस शीघ्र प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। इसकी कार्ययोजना बन चुकी है। विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण मतदाताओं के असंतोष को हवा देने की मुहिम में सभी वरिष्ठ कांग्रेसनेता जुटेंगे।

भाजपा की नजर कांग्रेस की मनरेगा को लेकर हर गतिविधि पर है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट ने कहा कि केंद्रीय बजट के साथ ही इसमें वीबी जीरामजी और मनरेगा के अंतर्गत सामग्री कंपोनेंट की व्यवस्था को जनता के समक्ष विस्तार से रखा जाएगा। विधायकों एवं सांसदों के साथ ही प्रदेश संगठन एवं आनुषंगिक संगठनों को भी यह जिम्मेदारी दी जा रही है।

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