तड़म गांव में बाघ के लगातार हमलों और एक महीने में दो मौतों के बाद मोहान सफारी जोन को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है।
कार्बेट व कालागढ़ टाइगर रिजर्व से लगे तड़म गांव में गम व गुस्से का माहौल रहा। बढ़ते मानव वन्यजीव टकराव व एक माह में दो जिंदगियां खत्म होने के बाद मोहान सफारी जोन को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है।
ग्रामीणों का तर्क था कि मोहान जोन में सफारी के चलते मानवीय गतिविधियां बढ़ने से बाघ व गुलदार हमलावर हो रहे हैं। उनका रुख गांव की तरफ हो गया है। पर्यटन गतिविधियों का खामियाजा आसपास के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
डीएफओ दीपक सिंह के निर्देश पर क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है। घटनास्थल व आसपास आठ पिंजरे लगाए जा रहे हैं। जनसुरक्षा को कड़े कदम उठाने का आश्वासन मिलने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने दिया गया।
मोहान सफारी जोन बंद
तल्ला सल्ट स्थित तड़म गांव के बौरड़ा तोक में बीते रविवार शाम 55 वर्षीय महिपाल सिंह मेहरा को बाघ ने मार डाला था। वन विभाग पूरे क्षेत्र में ड्रोन और ट्रैप कैमरों की मदद से वन्यजीव की शिनाख्त में जुट गया है। इधर ग्रामीणों की बात को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने मोहान सफारी जोन को बंद करा दिया है। ताकि वन्यजीव बहुल जंगल में जिप्सियों की आवाजाही बढ़ने से बाघ व गुलदार तड़म गांव की ओर न बढ़ सकें।
उप प्रभागीय वनाधिकारी काकुल पुंडीर ने कहा कि मानव वन्यजीव टकराव टालने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है।
वहीं ग्रामीणों ने एक माह पूर्व इसी गांव में बाघ के हमले में बुजुर्ग की मौत के बाद एसडीएम के निर्देश के बावजूद कुमेरिया से तड़म तक चार किमी पैदल रास्ते पर सोलर लाइट नहीं लगाए जाने पर भी नाराजगी जताई है। इस पर डीएफओ दीपक सिंह व एसडीओ पुंडीर ने भरोसा दिलाया कि तड़म तक जाने वाले घुमावदार व घने वनक्षेत्र के बीच से गुजरने वाले मार्ग पर शीघ्र सोलर लाइट लगाई जाएंगी।
ड्रोन से हिंसक वन्यजीव के खुलासे की जुगत, पेट्रोलिंग तेज
इधर सोमवार को नागरिक चिकित्सालय रानीखेत से पहुंचे चिकित्सकों के पैनल ने मोहान में मृतक महिपाल सिंह के शव का पोस्टमार्टम शुरू कर दिया है।
वन क्षेत्राधिकारी गंगाशरण की अगुआई में वन कर्मियों की विभिन्न टीम कुमेरिया से मंदाल रेंज तक पेट्रोलिंग की। ट्रैंकुलाइजर दल भी मुस्तैद है ताकि हिंसक वन्यजीव को बेहोश कर उसे सुरक्षित कैद कर ग्रामीणों को संघर्ष से निजात दिलाई जा सके। वहीं सीटीआर की भी मदद ली जा रही है।

