हरिद्वार में औद्योगिक विकास तेजी से बढ़ रहा है, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2,946 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इससे 23,212 नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, जो जिले को राज्य का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बना रहा है।
धर्मनगरी में आध्यात्मिक गंगा के साथ औद्योगिक विकास की गंगा भी तेजी से बह रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में 2,946 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली है।
364 प्रस्तावों में महज एक प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ। प्रस्तावित उद्योगों से 23,212 नए रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। नए वित्तीय वर्ष में भी करीब 107 करोड़ के निवेश के लिए 801 रोजगार वाले 18 प्रस्ताव मंजूर हो चुके हैं।
जिले में इंवेस्ट उत्तराखंड के तहत वर्ष 2016 से अभी तक 3,087 प्रस्ताव स्वीकृत हुए हैं। इनसे 15,011 करोड़ रुपये का निवेश और 1.05 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि हरिद्वार पिछले एक दशक में राज्य के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
सरकार की सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम नीति ने निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया है। उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावों की मंजूरी अब कुछ ही सप्ताह में हो जाती है, जिससे निवेशकों के समय की बचत होती है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, दिल्ली-एनसीआर से कनेक्टिविटी और कुशल श्रमबल की उपलब्धता ने भी हरिद्वार को आकर्षक बनाया है।
इन क्षेत्रों में आया सबसे अधिक निवेश
फार्मा, आटोमोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स, फूड प्रोसेसिंग और प्लास्टिक पैकेजिंग जैसे सेक्टरों में सबसे अधिक निवेश प्रस्ताव आए हैं।
इन क्षेत्रों की कंपनियां नई यूनिट स्थापित करने और मौजूदा क्षमता विस्तार की तैयारी में हैं। सिडकुल में इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा केंद्रित है, जहां पहले से ही हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर, हीरो मोटोकार्प, नेस्ले, आईटीसी जैसी कई बड़ी कंपनियां संचालित हो रही हैं।
फार्मा सेक्टर में जिले का मजबूत आधार
फार्मा सेक्टर में जिले का मजबूत आधार है। अब कई कंपनियां एपीआई और फार्मुलेशन यूनिट लगा रही हैं, जो निर्यात पर भी फोकस कर रही हैं। आटोमोबाइल कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रानिक्स में नई यूनिट आ रही हैं, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल से जुड़े पार्ट्स और असेंबलिंग पर काम करेंगी। फूड प्रोसेसिंग में फल-सब्जी आधारित यूनिट और प्लास्टिक पैकेजिंग में पर्यावरण अनुकूल विकल्पों पर जोर है।
इन प्रस्तावों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ होगा। छोटे उद्योगों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम मिलेगा, जिससे एमएसएमई सेक्टर भी मजबूत होगा। जिले के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर इन उद्योगों में रोजगार दिया जाएगा।
सरकार की भूमिका और नीतियां महत्वपूर्ण
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक उत्तम कुमार तिवारी का कहना है कि राज्य सरकार की एमएसएमई पालिसी-2023 और मेगा इंडस्ट्रियल एंड इंवेस्टमेंट पालिसी-2025 ने बड़े निवेश को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसमें कैपिटल सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में छूट और अन्य इंसेंटिव्स दिए जा रहे हैं। इसके अलावा प्राइवेट इंडस्ट्रियल एस्टेट पालिसी के तहत निवेशकों को जमीन आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।
कुछ चुनौतियां भी हैं सामने
निवेश बढ़ने के साथ पानी, बिजली और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। सरकार इन पर फोकस कर रही है। प्लास्टिक पैकेजिंग जैसे सेक्टरों में पर्यावरण अनुकूल प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
हरिद्वार न केवल धर्मनगरी के रूप में बल्कि औद्योगिक केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। निवेशकों के लिए बेहतर माहौल, पारदर्शी सिस्टम और स्थानीय सहयोग से यहां औद्योगिक विकास बढ़ रहा है।
जिले में वित्तीय वर्ष 2016-17 से अभी तक हुआ निवेश और सृजित रोजगार
| वित्तीय वर्ष | स्वीकृत प्रस्ताव | अस्वीकृत प्रस्ताव | प्रस्तावित निवेश (करोड़ रुपये में) | प्रस्तावित रोजगार (लगभग) |
|---|---|---|---|---|
| 2016-17 | 91 | 2 | 101 | 1,200 |
| 2017-18 | 141 | 4 | 337 | 3,230 |
| 2018-19 | 277 | 3 | 733 | 6,559 |
| 2019-20 | 385 | 7 | 1,320 | 13,377 |
| 2020-21 | 226 | 0 | 466 | 5,754 |
| 2021-22 | 382 | 0 | 1,559 | 9,763 |
| 2022-23 | 418 | 0 | 2,249 | 10,635 |
| 2023-24 | 390 | 0 | 2,219 | 13,259 |
| 2024-25 | 404 | 0 | 3,050 | 17,551 |
| 2025-26 | 363 | 1 | 2,946 | 23,212 |
| 2026-27 (अब तक) | 18 | 0 | 107 | 801 |

