सेना की टीम 16 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद हेमकुंड साहिब पहुंच गई है और मुख्य द्वार से बर्फ हटाने का कार्य शुरू कर दिया है। लोकपाल लक्ष्मण मंदिर 22 मई और हेमकुंड साहिब 23 मई को खुलने वाले हैं।
आखिरकार 16 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद सेना की टीम बर्फ हटाते हुए हेमकुंड साहिब पहुंच गई।
अब हेमकुंड साहिब में बर्फ हटाने के बाद दोबारा रास्ते में शेष रही बर्फ साफ की जाएगी। सेना की टीम व गुरुद्वारा के सेवादारों का डेरा भी हेमकुंड साहिब के लंगर में ही होगा।
लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 22 और हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को खोले जाने हैं। लेकिन, छोटी अटलाकोटी से हेमकुंड के बीच अभी भी बर्फ की चादर बिछी है। हेमकुंड साहिब परिसर में भी लगभग सात फीट बर्फ मौजूद है।
इस बर्फ को हटाने को का जिम्मा सेना की इंजीनियरिंग कोर के पास रहता है। इस बार भी इंजीनियरिंग कोर के 22 जवान व अधिकारियों के साथ गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब के 12 सेवादार भी यात्रा मार्ग से बर्फ हटाने के कार्य में जुटे हैं।
यह टीम गत 16 अप्रैल को हेमकुंड साहिब के बेस कैंप घांघरिया पहुंच गई थी और घांघरिया बेस कैंप में रहकर प्रतिदिन रास्ते से बर्फ हटा रही थी।
इसके लिए उसे रोजाना तीन किमी की खड़ी चढ़ाई नापनी पड़ रही थी, जिससे कार्य की गति धीमी पड़ रही थी। उस पर वर्षा-बर्फबारी से भी कार्य बाधित हो रहा था।
अब सेना की टीम ने हेमकुंड तक सीढ़ी वाला मार्ग सुचारु कर स्वयं भी हेमकुंड में ही डेरा डाल दिया है।
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने बताया कि हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के आसपास सात फीट तक बर्फ जमी है और हेमकुंड सरोवर भी बर्फ से ढका है।
सेना के साथ गुरुद्वारा मैनजेमेंट ट्रस्ट की रणनीति है कि पहले गुरुद्वारा, लंगर व चिकित्सालय के आसपास और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के आगे से बर्फ हटाई जाए।
फिर सरोवर का एक हिस्से से बर्फ हटाकर स्नान के लिए व्यवस्था की जाए। अंतिम चरण में हेमकुंड से अटलाकोटी तक छह फीट चौड़े मुख्य पैदल मार्ग से बर्फ हटाई जाएगी।

