शीतकाल में गंगा दर्शन की यात्रा कराती आध्यात्मिक अनुभूति, प्रकृति को नजदीक से देखना है तो चले आइए उत्तरकाशी

उत्तराखंड के मुखवा गांव में शीतकाल में गंगा दर्शन का विशेष महत्व है। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की डोली यहीं स्थापित होती है। प्रतिदिन 50-70 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। हर्षिल घाटी के पास स्थित यह गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी यहां से शीतकालीन यात्रा का संदेश दिया था।

मौसम में ठंडक घुलने के साथ मां गंगा के शीतकालीन प्रवास मुखवा गांव स्थित गंगा मंदिर परिसर में चहल-पहल बढ़ने लगी है और रोजाना 50 से 70 श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन को मुखवा पहुंच रहे हैं।

शीतकाल में गंगा दर्शन की यात्रा आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक सुंदरता की अनुभूति कराती है। समुद्रतल से 8593 फीट की ऊंचाई पर स्थित मुखवा गांव, जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से करीब 83 किमी की दूरी पर है।

हर्षिल घाटी की उपला टकनौर पट्टी के आठ गांवों में से एक मुखवा कई मायने में खास है। यहां पहाड़ी शैली में बने एक जैसे मकान और उनके बीच विराजमान गंगा मंदिर सम्मोहन-सा बिखेरता है।

अन्नकूट पर्व पर गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की डोली शीतकाल के लिए इसी मंदिर में प्रतिष्ठित होती है। वर्तमान में बाइकर्स ग्रुप के अलावा परिणय सूत्र में बंधने के लिए युवा जोड़े भी मुखवा पहुंच रहे हैं।

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