उत्तराखंंड विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा ने रणनीति में किया बदलाव, प्रकोष्ठों से साधेगी समाज के प्रभावशाली वर्ग

भाजपा ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है, अब मोर्चों के साथ प्रकोष्ठों को भी चुनावी फ्रंट पर उतारा जाएगा। इसका उद्देश्य समाज के प्रभावशाली और प्रबुद्ध वर्गों तक सीधी पहुंच बनाकर पार्टी की पैठ मजबूत करना है।

 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पहली बार पार्टी मोर्चों के साथ-साथ प्रकोष्ठों को भी चुनावी फ्रंट पर उतारने जा रही है। बूथ और मंडल की चुनावी संरचना से आगे बढ़ते हुए भाजपा अब समाज के प्रभावशाली और प्रबुद्ध वर्ग तक सीधी पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

सभी प्रकोष्ठों से अगले दो माह की विस्तृत कार्ययोजना मांगी गई है। चुनाव तक हर प्रकोष्ठ अपने-अपने वर्ग में लगातार कार्यक्रम चलाकर पार्टी की पैठ मजबूत करेगा। इसे भाजपा की माइक्रो सोशल इंजीनियरिंग का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें प्रभावशाली सामाजिक वर्गों को साधने की जिम्मेदारी प्रकोष्ठों के कंधों पर होगी।

भाजपा का मानना है कि पार्टी विधानसभा चुनाव केवल संगठनात्मक ढांचे के बलबूते नहीं लड़ेगी। समाज के प्रभावशाली वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने, सरकार की योजनाओं को पहुंचाने और नए समर्थकों को जोड़ने की जिम्मेदारी भी उठानी होगी।

प्रकोष्ठों के जरिए पार्टी डॉक्टर, वकील, शिक्षाविद, उद्यमी, स्वयं सहायता समूह, गोरखा समाज, पंचायत प्रतिनिधि, निकाय प्रतिनिधि, दिव्यांग, सांस्कृतिक और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों समेत विभिन्न वर्गों में अपनी पैठ और मजबूत करना चाहती है।

सभी प्रकोष्ठों से अगले दो माह की विस्तृत कार्ययोजना मांगी गई

भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने बताया कि सोमवार को देहरादून और मंगलवार को हरिद्वार में दो दिवसीय कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक के प्रकोष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। कार्यशालाओं में प्रत्येक प्रकोष्ठ के लिए अलग-अलग सेक्टरवार जिम्मेदारियां तय की जाएंगी और यह खाका तैयार होगा कि चुनाव तक किस वर्ग के बीच किस प्रकार के कार्यक्रम चलाए जाएं।

दो चरण में दी जाएंगी जिम्मेदारियां

पहले चरण में भाजपा विधि, निकाय, पंचायत, एनजीओ, गोरखा और स्वयं सहायता समूह प्रकोष्ठ को प्रशिक्षित करेगी और दूसरे चरण में धर्म-संस्कृति, सांस्कृतिक गतिविधियां, पर्यटन, आपदा प्रबंधन, प्रबुद्ध वर्ग व दिव्यांग समेत अन्य प्रकोष्ठों को चुनावी जिम्मेदारी दी जाएगी। पार्टी चाहती है कि प्रत्येक प्रकोष्ठ अपने क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली लोगों के साथ नियमित बैठकें करें, संवाद स्थापित कर सरकार की उपलब्धियों को हर वर्ग तक पहुंचाएं।

प्रकोष्ठों के प्रदेश संयोजक कौस्तुभानंद जोशी ने दी जानकारी

प्रकोष्ठों के प्रदेश संयोजक कौस्तुभानंद जोशी ने बताया कि अब तक भाजपा के चुनावी अभियानों में मोर्चे अहम भूमिका निभाते रहे हैं। इस बार प्रकोष्ठों को भी समानांतर रूप से चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया जा रहा है। संगठन का मानना है कि इससे समाज के विशिष्ट और प्रबुद्ध वर्गों तक सीधा संवाद स्थापित होगा और वर्ग आधारित चुनावी रणनीति को अधिक मजबूती मिलेगी।

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