भाजपा हिमालय के सीमांत क्षेत्रों में राष्ट्रवाद का नया प्रयोग कर रही है। आदि कैलास के पास गुंजी में कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर लगाकर पार्टी अपनी वैचारिक जड़ों को मजबूत कर रही है।
राजनीति में जब भी बड़े प्रतीकों के जरिये संदेश देने की कोशिश होती है, तो नजर हिमालय की ओर उठती है। आदि कैलास के पास गुंजी में कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर लगाकर भाजपा आस्था, संस्कृति और राष्ट्रवाद का कुछ ऐसा ही उद्घोष करना चाहती है।
गंगासागर से गंगोत्री तक भगवा लहराने के बाद पार्टी शिविर के जरिये अपनी वैचारिक व राजनीतिक जड़ों को हिमालय के सीमांत क्षेत्रों में और गहरा करने की कोशिश में है।
13 मई से आयोजित होगा प्रशिक्षण शिविर
आदि कैलास के नजदीक 13 मई से आयोजित होने जा रहा यह प्रशिक्षण शिविर पहली नजर में सामान्य संगठनात्मक गतिविधि लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की राजनीतिक पटकथा बड़ी गहरी है। दरअसल भाजपा राजनीति में स्थानों का महत्व बखूबी समझती है।
अयोध्या, काशी, केदारनाथ और अब आदि कैलास। विगत कुछ वर्षों में पार्टी ने धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को केवल आस्था के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी प्रतीकों के रूप में भी स्थापित किया है। इसी रणनीति के तहत अब सीमांत हिमालय को भाजपा नई राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने जा रहा है।

