भाजपा उत्तर प्रदेश में अनुभवी चेहरों को चुनावी प्रबंधन में समायोजित करेगी, उन्हें प्रकोष्ठों, प्रकल्पों और चुनाव समितियों में भूमिकाएं देगी। पार्टी 20 से अधिक पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों को शामिल करेगी और क्षेत्रीय प्रभारियों को प्राथमिकता देगी, साथ ही निगमों व आयोगों में रिक्त पदों पर अवसर प्रदान करेगी।
चुनावी मोड में चल रही भाजपा अपने किसी भी अनुभवी व परिश्रम चेहरे को मायूस नहीं होने देगी। पार्टी ने साफ किया है कि जिन्हें प्रदेश इकाई, मोर्चों व क्षेत्रीय टीमों में समायोजित नहीं किया जा सका, उन्हें प्रकोष्ठों, प्रकल्पों व चुनाव समितियों समेत कई अन्य इकाइयों में भूमिकाएं दी जाएंगी। प्रदेश इकाई से महामंत्री, उपाध्यक्ष व मंत्री के रूप में कार्य कर चुके बीस से ज्यादा चेहरों को चुनावी प्रबंधन में शामिल करने की रणनीति बनाई जा रही है।
पार्टी सबसे पहले ऐसे चेहरों को अवसर देगी, जो किसी न किसी क्षेत्र के प्रभारी रह चुके हैं। उनके जातीय समीकरण व क्षेत्र में पकड़ देखते हुए नई चुनावी योजनाएं बनाई जाएंगी। अनुभवी चेहरों को निगम, आयोग, बोर्ड व प्राधिकरणों में खाली पदों पर अवसर देकर उनके चेहरे पर चमक लाने का प्रयास होगा।
होली के आसपास प्रदेश के 761 नगरीय निकायों में 2805 सभासदों की नियुक्ति की गई थी, जिसके बाद जिलों की टीमें बनाई गईं। अब प्रदेश की टीम बनाने के साथ ही छह क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा कर दी गई है। छह मोर्चों में भी बड़े बदलाव करते हुए जनप्रतिनिधियों को भी अवसर दिया गया है। अनुसूचित मोर्चा का प्रभार मिश्रिख के सांसद अशोक रावत को दिया गया है।
इसी प्रकार इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा को उनकी क्षमता देखते हुए युवा मोर्च की कमान दी गई है। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि क्षेत्रीय टीमों में महामंत्री, उपाध्यक्ष एवं मंत्री के रूप में कई जमीनी चेहरों को जिम्मा दिया जाएगा। वहीं, मोर्चों में भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का समायोजन कर लिया जाएगा।

