कॉमनवेल्थ मेडल जीतने के बावजूद एशियन गेम्स से बाहर, हर्ष और उन्नति को क्यों नहीं मिली जगह?

राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेता हर्ष सिंह और उन्नति शर्मा को एशियाई खेलों की जूडो टीम से रैंकिंग मानदंड के कारण बाहर कर दिया गया है।

 खेलों में चयन का अंतिम लक्ष्य क्या होना चाहिए रैंकिंग या बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक जीतने की क्षमता? आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय जूडो टीम के चयन ने इस सवाल को फिर सामने ला दिया है। राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए पदक जीत चुके जुडोका हर्ष सिंह और उन्नति शर्मा को एशियाड टीम में जगह नहीं मिलने से चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। दोनों खिलाड़ियों के चयन में एशिया की शीर्ष छह रैंकिंग का मानक बड़ी बाधा बना है।

मंत्रालय के मौजूदा मानक के अनुसार एशियाई खेलों के लिए उन्हीं खिलाड़ियों को प्राथमिकता मिलनी है, जो एशिया में शीर्ष छह रैंकिंग में हों। सवाल यह है कि क्या केवल रैंकिंग किसी खिलाड़ी की वास्तविक पदक क्षमता का पूरा आकलन कर सकती है? अगर कोई खिलाड़ी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक जीत चुका है, लगातार प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन कर रहा है और दबाव में खुद को साबित कर चुका है, तो उसे केवल रैंकिंग के आधार पर बाहर करना कितना उचित है?

पदक जीतने की क्षमता पर रैंकिंग भारी

हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीत चुके हैं, जबकि उन्नति शर्मा ने 63 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया है। इसके बावजूद दोनों एशियाई खेलों की टीम से बाहर हैं। दूसरी ओर, मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने फिलहाल तीन महिला जुडोकाओं के नामों को मंजूरी दी है, जो निर्धारित शीर्ष छह रैंकिंग मानक पूरा करती हैं।
यह स्थिति चयन नीति की उस सोच पर सवाल खड़ा करती है, जिसमें रैंकिंग को खिलाड़ी के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन से ऊपर रखा जा रहा है। रैंकिंग निश्चित रूप से चयन का एक पैमाना हो सकती है, लेकिन क्या उसे एकमात्र निर्णायक आधार बनाया जाना चाहिए?

फेडरेशन की सिफारिश भी नहीं आई काम

जूडो फेडरेशन ऑफ इंडिया (जेएफआई) ने एशियाई खेलों के लिए तीन पुरुष और तीन महिला खिलाड़ियों के नामों की सिफारिश की थी। इसमें हर्ष और श्रद्धा जैसे खिलाड़ी शामिल थे। हालांकि, अरुण कुमार के डोपिंग मामले में फंसने और हर्ष और श्रद्धा के शीर्ष छह रैंकिंग मानक को पूरा नहीं करने के कारण चयन अटक गया। उन्नति भी इसी मानदंड के चलते टीम में जगह नहीं बना सकीं।

पदकवीरों ने मांगा एक और मौका

चयन से बाहर होने के बाद हर्ष और उन्नति ने खेल राज्य मंत्री के समक्ष अपनी बात रखकर चयन पर पुनर्विचार की मांग की है। जेएफआई भी मंत्रालय और साई के अधिकारियों से संपर्क में है।

जेएफआइ का कहना है कि एशियाई खेलों की चुनौती कठिन जरूर है, लेकिन राष्ट्रमंडल पदकवीरों के अनुभव, आत्मविश्वास और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ओलंपिक और एशियाई खेलों में पदक जीतने के लिए ऐसे ही अनुभवी और सिद्ध खिलाड़ियों की जरूरत होती है। यदि पदकवीरों को ही रैंकिंग के एक पैमाने पर रोक दिया जाएगा, तो बड़े मंच पर देश के लिए पदक लाने वाले खिलाड़ियों की पहचान और तैयारी कैसे होगी?

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