देश के 5 अनोखे शिव मंदिर, जहां होती है महादेव की सबसे अलग और अद्भुत पूजा

हिंदू धर्म में श्रावण मास अत्यंत पवित्र माना जाता है, जब भगवान शिव धरती पर निवास करते हैं। भारत के कुछ खास शिव मंदिरों में सावन के दौरान अनोखी पूजा पद्धतियां देखने को मिलती हैं।

 हिंदू धर्म में श्रावण मास का महीना अत्यंत पवित्र और खास माना जाता है, क्योंकि कहा जाता है कि, इस एक महीने भगवान शिव अपने परिवार के साथ धरती पर निवास करते हैं, न कि कैलाश पर्वत पर जो इस महीने को और भी खास बना देता है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत के शिव मंदिरों में सावन में अलग ही तरह की भक्ति देखने को मिलती है।

सुबह से शाम तक भक्त लगातार भगवान शिव के दर्शन कर जलाभिषेक करते हैं। लेकिन जहां भारत के अधिकतर मंदिरों में श्रावण मास के दौरान पूजा पद्धति लगभग एक जैसी दिखाई देती है, वहीं देशभर के कुछ खास शिव मंदिरों में श्रावण मास के दौरान अलग तरह की पूजा देखने को मिलती है। आइए जानते हैं इन खास मंदिरों के बारे में।

1. महाकालेश्वर मंदिर (उज्जयिनी, मध्य प्रदेश)

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर का जिक्र स्कंद पुराण और शिव पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है। मान्यता है कि, यह मंदिर करीब 2000 साल पुराना है, जिस वजह से इस मंदिर का प्राचीन इतिहास और भी ज्यादा खास बन जाता है। श्रावण मास के दौरान महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती का आयोजन होने के साथ शहर भर में उनकी सवारी निकाली जाती है, जिसे ‘महाकाल की सवारी’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा मंदिर में स्थिति ज्योतिर्लिंग दक्षिणमुखी है, जो इसे और भी विशेष बनाता है।

2. निष्कलंक महादेव मंदिर (भावनगर, गुजरात)

भगवान महादेव का अनोखा मंदिर गुजरात के भावनगर में भी स्थित है। इस मंदिर की खासयित यह है कि इसकी पूजा पूरी तरह से ज्वार-भाटा यानी समुद्र की लहरों पर निर्भर करती है। श्रावण मास के दौरान श्रद्धालु समुद्र का पानी कम होने का इंतजार करते हैं, ताकि जब पानी घटे तो वह समुद्र में चलकर पांच शिवलिंगों की पूजा करते हैं। कुछ घंटों बाद मंदिर एक बार फिर से समुद्र के पानी में समा जाता है।

3. बाबा वैद्यनाथ धाम (देवघर, झारखंड)

श्रावण मास में देवघर में भक्तों का सैलाब देखने को मिलता है। यहां आने वाले श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगा नदी का पवित्र जल लेकर करीब 105 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा तय करके देवघर आते हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि, यहां भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के साथ शक्तिपीठ भी है।

4. त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (नासिक, महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित है, त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग जो कि एक अंगूठे के आकार का गड्ढा है। इस ज्योतिर्लिंग में तीन छोटे-छोटे लिंग बने हुए हैं, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। श्रावण मास के दौरान इस मंदिर की पूजा बेहद अलग होती है। इस गड्ढे से लगातार पानी निकलता रहता है। सावन सोमवार के दिन यहाँ भगवान शिव को सोने का मुखौटा पहनाकर शहरभर में घुमाया जाता है। इसके बाद गोदावरी नदी के पानी से शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है।

5. अचलेश्वर महादेव मंदिर (धौलपुर, राजस्थान)

श्रावण मास के दौरान इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। बताया जाता है कि, मंदिर में स्थित शिवलिंग रंग बदलता है। सुबह लाल, दोपहर को केसरिया और शाम होते-होते गहरे सांवले रंग का दिखाई देता है। मंदिर में श्रावण मास के दौरान शिवलिंग के बदलते रंगों के आधार पर अलग-अलग प्रहरों में खास श्रृंगार किया जाता है।

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