अल्मोड़ा में 9 साल बाद ‘राजू और मोती’ को मिली आजादी, कुमाऊं महोत्सव में ऊंटों के व्यावसायिक उपयोग पर कार्रवाई

बिना पंजीकरण व्यावसायिक उपयोग के लिए संचालक पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई, जिससे उसकी आजीविका प्रभावित हुई।

मरुस्थल से निकल तराई, भाबर में कैद की जिंदगी बिता रहे राजू और मोती को आखिर पहाड़ में आकर आजादी मिली। दोनों नौ वर्षों तक कैद में रहे। रविवार को पशु सुरक्षा सेवा समिति ने कुमाऊं महोत्सव में आए दोनों ऊंटों राजू और मोती काे रेस्क्यू कर उनके प्राकृतिक पर्यावास में जयपुर भेजा।
बीते 22 जून को शाहिद अंसारी निवाली ढिकुली, रामनगर से दो ऊंटों राजू और मोती को लेकर कुमाऊं महोत्सव पहुंचा। दोनों ऊंटों की उम्र 9 वर्ष थी।

महोत्सव में वह ऊंटों पर सवारी कराकर पैसे कमा रहा था। जैसे ही पशु सुरक्षा समिति को पता चला। वह जीआईसी में चल रहे महोत्सव में पहुंच गए। कहा कि ऊंटों का पहाड़ी क्षेत्र में व्यवसायिक प्रयोग प्रतिबंधित है। संचालक को सभी नियम कानून बताए गए।

कुमाऊं महोत्सव में बिना पंजीकरण ऊंट चलाने पर संचालक पर हुई कार्रवाई

संचालक ने 23 जून को ऊंटों को लेकर वापस चले जाने की बात कही। लेकिन उसके बाद भी वह नहीं गया और बीते 27 जून तक वह कुमाऊं महोत्सव में दोनों ऊंटों का व्यवसायिक इस्तेमाल करते रहा। जिसके बाद कार्रवाई करते हुए पशु सुरक्षा सेवा समिति ने संचालन पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के उल्लंघन का लगाया आरोप और प्राथमिकी दर्ज कराई।

छह लाख में खरीदे थे दो ऊंट

संचालक शाहिद ने बताया कि उन्होंने बिजनौर से छह लाख में दो ऊंट खरीदे थे। कई वर्षाें से वह मेले में जाकर इन ऊंटों की पीठ पर लोगों को सवारी करा पैसा कमाता था। उसकी आजीविका का एकमात्र साधन यही ऊंटे थे। उन्होंने कहा कि ऊंटों को रेस्क्यू कराने उसकी आजीविका छीन गई है। सात लाख का कर्ज है। चार बच्चे है। अब घर कैसे चलेगा।

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